राजस्थान में मानसून का अलर्ट: 36 जिलों में तेज बारिश की संभावना, 16 सितंबर तक रहेगा सिस्टम का असर
राजस्थान में मानसून का अलर्ट: 36 जिलों में तेज बारिश की संभावना, 16 सितंबर तक रहेगा सिस्टम का असर
NewsPoint•
राजस्थान में मानसून एक बार फिर ज़ोर पकड़ने वाला है। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के सभी 36 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। रविवार को भले ही राज्य के कई हिस्सों में मौसम साफ रहा हो, लेकिन बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर सिस्टम के कारण 16 सितंबर तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की पूरी संभावना है।
रविवार को जयपुर, भरतपुर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर संभागों में मौसम ज्यादातर साफ रहा। इन इलाकों में दिनभर बारिश कम हुई और लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ा। वहीं, कोटा और उदयपुर संभागों में दोपहर बाद आसमान में हल्के बादल छाए रहे और कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश भी हुई। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में इस लो-प्रेशर सिस्टम का असर बढ़ेगा, खासकर पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में बादल छाने और बारिश होने की उम्मीद है।मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून ट्रफ (मानसून की वह रेखा जो बारिश वाले इलाकों को जोड़ती है) सामान्य से थोड़ी दक्षिण की ओर खिसक गई है। यह ट्रफ आज जैसलमेर और कोटा से होते हुए लो-प्रेशर सिस्टम की तरफ बढ़ रही है। इसके बाद इसका रास्ता विदर्भ, राजनांदगांव और भवानीपटना से होकर बंगाल की खाड़ी तक जाएगा। मानसून ट्रफ की इस बदली हुई स्थिति का असर राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दिख रहा है। कहीं बादल छाए हैं तो कहीं मौसम साफ है। अगले एक-दो दिनों में सिस्टम की स्थिति और दिशा के आधार पर बारिश की तीव्रता में बदलाव आ सकता है।
पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है। मानसून के सक्रिय होने और बारिश के अलर्ट के बावजूद, सितंबर के दूसरे हफ्ते में भी कई इलाकों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। इससे पता चलता है कि पश्चिमी राजस्थान में मानसून की बारिश का असर अभी कम है।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे स्थानीय मौसम की जानकारी पर नज़र रखें। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में जलभराव और सड़कों पर पानी भरने जैसी स्थिति बन सकती है। ग्रामीण इलाकों के किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे मौसम की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए ही अपने कृषि संबंधी काम करें।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर सिस्टम 16 सितंबर तक राजस्थान के मौसम को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। रविवार को बारिश कमजोर रहने के बाद, सोमवार को 36 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट मौसम में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
यह लो-प्रेशर सिस्टम दरअसल बंगाल की खाड़ी में बना एक ऐसा मौसमी सिस्टम है जो अपने साथ नमी और बारिश लाता है। जब यह सिस्टम ज़मीन की ओर बढ़ता है, तो यह अपने रास्ते में आने वाले इलाकों में भारी बारिश करा सकता है। राजस्थान में इसका असर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य में मानसून की गतिविधियों को फिर से सक्रिय कर सकता है।
मानसून ट्रफ का दक्षिण की ओर खिसकना एक महत्वपूर्ण मौसमी घटना है। यह ट्रफ आमतौर पर उन इलाकों से गुजरती है जहाँ बारिश की संभावना अधिक होती है। जब यह अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक जाती है, तो इसका मतलब है कि बारिश का ज़ोर उन इलाकों में ज़्यादा हो सकता है जो ट्रफ के नए रास्ते पर पड़ते हैं। राजस्थान के संदर्भ में, इसका मतलब है कि पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का बने रहना एक अलग स्थिति है। जहाँ एक ओर मानसून सक्रिय होने की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी राजस्थान में तापमान का 40 डिग्री के आसपास रहना यह दर्शाता है कि मानसून की हवाएँ वहाँ उतनी प्रभावी नहीं हो पा रही हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि हवाओं की दिशा या अन्य मौसमी बाधाएँ।
मौसम विभाग द्वारा जारी की गई चेतावनियाँ लोगों को सुरक्षित रहने में मदद करती हैं। तेज बारिश के दौरान, खासकर शहरी इलाकों में, जल निकासी की समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। सड़कों पर पानी भर जाने से यातायात बाधित हो सकता है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, लोगों को सतर्क रहने और विभाग द्वारा दी गई सलाह का पालन करने की आवश्यकता है।
किसानों के लिए भी यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है। कृषि कार्य मौसम पर बहुत निर्भर करते हैं। तेज बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है, जबकि सही समय पर हुई बारिश फसलों के लिए फायदेमंद होती है। इसलिए, किसानों को मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार ही अपने काम की योजना बनानी चाहिए।
कुल मिलाकर, राजस्थान में आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। लो-प्रेशर सिस्टम और मानसून ट्रफ की स्थिति मिलकर प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश ला सकती है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान में गर्मी का असर अभी भी बना रह सकता है। लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की सलाह दी जाती है।