दिल्ली HC ने विमल इलायची की याचिका खारिज की, शाहरुख खान, अजय देवगन, टाइगर श्रॉफ को नोटिस पर महाराष्ट्र FDA का अधिकार क्षेत्र

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नई दिल्ली, 15 सितंबर: दिल्ली उच्च न्यायालय ने विमल इलायची से जुड़ी कंपनी पीबी एग्रो की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा बॉलीवुड अभिनेताओं शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल पान मसाला के कथित छद्म विज्ञापन को लेकर जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया कि यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अदालत ने साफ कहा कि महाराष्ट्र एफडीए द्वारा जारी नोटिसों से जुड़ी शिकायतों और आपत्तियों को उठाने के लिए महाराष्ट्र ही सही जगह है। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि मामले का कोई अहम हिस्सा दिल्ली में उत्पन्न हुआ था।

पीबी एग्रो ने अपनी याचिका में यह दलील दी थी कि दिल्ली उच्च न्यायालय को इस मामले की सुनवाई का अधिकार है क्योंकि कंपनी का मुख्यालय दिल्ली में है। कंपनी का कहना था कि विज्ञापन अभियान की योजना, तैयारी और प्रबंधन राष्ट्रीय राजधानी से ही किया गया था। इतना ही नहीं, कंपनी ने यह भी दावा किया था कि ब्रांड एंबेसडरों को भुगतान भी दिल्ली से ही किया गया था। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को नहीं माना। अदालत ने कहा कि पीबी एग्रो को कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था। कंपनी को न तो जवाब दाखिल करने, न ही कोई विज्ञापन हटाने, न ही दस्तावेज पेश करने और न ही महाराष्ट्र एफडीए के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था।
यह पूरा विवाद महाराष्ट्र एफडीए द्वारा शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल पान मसाला के कथित अप्रत्यक्ष प्रचार के संबंध में जारी किए गए नोटिसों से जुड़ा है। ये अभिनेता असल में कंपनी द्वारा बेचे जाने वाले उत्पाद विमल इलायची के विज्ञापनों से जुड़े रहे हैं। सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीबी एग्रो की याचिका पर सुनवाई के बाद क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कंपनी ने महाराष्ट्र एफडीए द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करने के निर्देश देने की मांग की थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पीबी एग्रो ने यह तर्क दिया था कि नोटिस केवल अभिनेताओं को जारी किए गए थे, कंपनी को नहीं। कंपनी का कहना था कि पीबी एग्रो ही वह इकाई है जिसे विज्ञापन से संबंधित किसी भी कार्रवाई से अपूरणीय क्षति हो सकती है। कंपनी ने यह भी दलील दी थी कि महाराष्ट्र एफडीए के पास विज्ञापन को रोकने के लिए निर्देश जारी करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में पीबी एग्रो की याचिका की स्वीकार्यता का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कंपनी को बॉम्बे उच्च न्यायालय में अपील करनी चाहिए थी, क्योंकि विवादित कार्रवाई महाराष्ट्र एफडीए द्वारा की गई थी। सीसीपीए ने यह भी कहा कि यद्यपि वह इस मुद्दे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रहा है, लेकिन उसे महाराष्ट्र एफडीए द्वारा नोटिस जारी करने पर कोई आपत्ति नहीं है।

यह मामला तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र एफडीए ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी कर पूछा कि विमल पान मसाला के विज्ञापनों में उनके कथित अप्रत्यक्ष प्रचार के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। ये अभिनेता विमल इलायची के विज्ञापनों में नजर आते रहे हैं, और कंपनी का आरोप है कि वे अनजाने में पान मसाले का भी प्रचार कर रहे हैं। पीबी एग्रो, जो विमल इलायची बनाती है, ने इस नोटिस को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। कंपनी का कहना था कि दिल्ली में उसका मुख्यालय होने और विज्ञापन गतिविधियों के दिल्ली से संचालित होने के कारण दिल्ली उच्च न्यायालय को इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए।

हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इन तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि नोटिस महाराष्ट्र एफडीए द्वारा जारी किए गए थे और इसलिए, महाराष्ट्र में ही इस मामले को उठाया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि पीबी एग्रो को सीधे तौर पर कोई नोटिस नहीं दिया गया था, इसलिए कंपनी को इस मामले में सीधे याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। अदालत का यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि कानूनी मामलों में क्षेत्राधिकार का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है।

यह मामला उपभोक्ता संरक्षण और विज्ञापन की नैतिकता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है। जब कोई सेलिब्रिटी किसी उत्पाद का प्रचार करता है, तो यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि वे केवल उसी उत्पाद का प्रचार करें जिसके लिए वे अधिकृत हैं, और अनजाने में किसी अन्य उत्पाद को बढ़ावा न दें, खासकर यदि वह उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो। महाराष्ट्र एफडीए का यह कदम इसी दिशा में एक प्रयास था।

पीबी एग्रो की याचिका खारिज होने से यह स्पष्ट हो गया है कि अब कंपनी को महाराष्ट्र एफडीए के नोटिसों से संबंधित किसी भी मुद्दे को महाराष्ट्र में ही उठाना होगा। यह फैसला अन्य कंपनियों के लिए भी एक सबक है कि उन्हें अपने कानूनी मामलों में सही क्षेत्राधिकार का चयन करना चाहिए। दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले ने यह सुनिश्चित किया है कि कानूनी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से चलें और संबंधित प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र का सम्मान किया जाए।

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