मनीष नरवाल: सुनहरे मेडल के साथ भारत के पैरा शूटर ने विश्व स्तर पर बनाई पहचान
मनीष नरवाल: सुनहरे मेडल के साथ भारत के पैरा शूटर ने विश्व स्तर पर बनाई पहचान
NewsPoint•
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय एथलीटों और पैरा एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाजी में देश का नाम रोशन किया है। चाहे वह ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स या एशियन गेम्स हो, भारतीय निशानेबाज हमेशा पदक लाते हैं। मनीष नरवाल, जो एक पैरा-पिस्टल शूटर हैं, ने टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड जीता। उनका जन्म 17 अक्टूबर 2001 को बल्लभगढ़, हरियाणा में हुआ। हरियाणा को खेलों का गढ़ माना जाता है और यहीं से मनीष ने निशानेबाजी में करियर बनाने का मन बनाया।
मनीष नरवाल के परिवार में खेलों का माहौल था। उनके पिता पहलवान थे और उनके दो भाई भी निशानेबाजी करते थे। इस कारण मनीष को किसी प्रकार की घरेलू रुकावट का सामना नहीं करना पड़ा। उनकी शूटिंग की यात्रा 15 साल की उम्र से शुरू हुई। मनीष SH1 कैटेगरी में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में हिस्सा लेते हैं। उनका पहला इंटरनेशनल मैच 2017 में बैंकॉक वर्ल्ड कप में हुआ था। कोच जय प्रकाश नौटियाल के मार्गदर्शन में, नरवाल ने इस प्रतियोगिता में गोल्ड जीता और जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।2018 एशियन पैरा-गेम्स में मनीष ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पी1-मेन्स 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में एक गोल्ड और पी4-मिक्स्ड 50 मीटर फ्री पिस्टल इवेंट में एक सिल्वर जीता। इस प्रदर्शन के बाद, मनीष को एक स्टार पैरा-शूटर के तौर पर पहचान मिली।
मनीष की सबसे बड़ी सफलता टोक्यो पैरालंपिक में मिली, जहां उन्होंने पी4-मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल इवेंट में गोल्ड जीता। इसके अलावा, पेरिस पैरालंपिक में भी उन्होंने 10 मीटर में सिल्वर मेडल जीता। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए, भारत सरकार ने उन्हें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया है।
इन उपलब्धियों के साथ, मनीष नरवाल न केवल निशानेबाजी में एक प्रेरणा स्रोत बन गए हैं, बल्कि उन्होंने पूरे देश का मान भी बढ़ाया है। उनका करियर और उपलब्धियां अगली पीढ़ी के एथलीटों के लिए एक उदाहरण हैं। उनका सफर हमें यह सिखाता है कि संघर्ष और मेहनत से हर सपने को सच किया जा सकता है।