कृषि मंत्री शिवराज सिंह का आश्वासन, रबी सीजन 2026 के लिए किसानों को मिलेगी पर्याप्त खाद और वित्तीय सहायता
कृषि मंत्री शिवराज सिंह का आश्वासन, रबी सीजन 2026 के लिए किसानों को मिलेगी पर्याप्त खाद और वित्तीय सहायता
NewsPoint•
नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अल-नीनो की आशंका, मानसून में कम बारिश और अंतरराष्ट्रीय उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि के बीच, मोदी सरकार देश के किसानों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान कहा कि चाहे मौसम की मार हो या प्राकृतिक आपदा, सरकार किसानों के साथ हर कदम पर खड़ी है। शिवराज सिंह ने रबी बुवाई के लिए खाद, बीज और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता का भरोसा दिलाया और साथ ही प्रदूषण के मामले में किसानों को दोष देने पर कड़ा एतराज जताया।
शिवराज सिंह ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में कृषि विकास में बड़ा इजाफा हुआ है। उन्होंने कृषि के तीन ऐतिहासिक चरणों का उल्लेख करते हुए बताया कि 2015 के बाद खाद्यान्न उत्पादन में औसत वार्षिक वृद्धि दर 8.4 मिलियन टन तक पहुंच गई है। उन्होंने यह स्पष्टीकरण भी दिया कि हाल के दिनों में बरसात में कमी आई है, लेकिन इसका असर किसानों की बुवाई पर बहुत कम पड़ा है। सरकार ने अल-नीनो से निपटने के लिए पहले ही आवश्यक कदम उठाए थे।कृषि मंत्री ने ये भी बताया कि किसानों के लिए उर्वरकों का अच्छा भंडार मौजूद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों के बढ़ने के बावजूद, भारत में इसकी कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा, "सरकार ने बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान का खाका तैयार किया है, ताकि किसान बेहतर तकनीक का उपयोग कर सकें।"
उन्होंने बताया कि रबी फसल के लिए राज्य सरकारें योजना बना रही हैं। पंचायत स्तर पर किसानों की आवश्यकताओं को समझते हुए और राज्य और केंद्र के बीच संवाद बनाते हुए, ये बैठकें हो रही हैं। रबी के लिए पहले से ही सभी आवश्यक संसाधनों का सही अनुमान लगाया गया है।
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष उर्वरक का भंडार लगभग बढ़कर 163 लाख मीट्रिक टन पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी राज्यों के साथ संपर्क बना कर खाद की आपूर्ति कर रही है।
शिवराज सिंह ने जानकारी दी कि खरीफ फसलों के क्षेत्र में मामूली कमी आई है, लेकिन अधिकांश फसलों में अच्छा उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा, "उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर जैसी फसलों के लिए रकबा बढ़ा है।"
कृषि विज्ञान के मानकों के अनुसार, यदि बारिश में सिर्फ 19 प्रतिशत से कम कमी है, तो इसे गंभीर सूखा नहीं माना जाता। इस साल भी बारिश में 12 प्रतिशत की कमी रह गई है। शिवराज सिंह ने बताया कि पहले इसे 14 प्रतिशत माना गया था, लेकिन हाल की बारिशों ने स्थिति को थोड़ा सुधारा है।
इसके अलावा, मंत्री साहब ने कहा कि मौसम की अनियमितताओं और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों का दौरा करने के लिए केंद्रीय टीमें भेजी जा रही हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में राहत पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए भी सरकार तत्पर है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के तहत किसानों को राहत देने के लिए फंड की व्यवस्था की जा रही है।
स्वच्छता और प्रदूषण के मुद्दे पर भी बात करते हुए, शिवराज सिंह ने कहा कि पराली जलाने में किसानों का योगदान काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा, "निरंतर संवाद और किसानों की जागरूकता के कारण वर्ष 2019-20 में जहां प्रदूषण में पराली का योगदान करीब 7 प्रतिशत था, वह अब घटकर लगभग 2.5 प्रतिशत रह गया है।"
कृषि मंत्री ने किसानों की आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कई नीतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगर बाजार में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे गिरती हैं, तो सरकार सीधे मंडियों में जाकर खरीद करेगी।
शिवराज सिंह ने अंत में कहा कि सरकार ने किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए भी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एग्रीस्टैक के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों के मोबाइल पर पहुंचाई जाएगी।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार किसानों की भलाई के लिए हरसंभव उपाय कर रही है ताकि वे प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित न हों और उनकी कृषि गतिविधियों में कोई बाधा न आए।