थाईसेनक्रुप स्टील डील अटकी: भारत की जिंदल स्टील से बातचीत ठप, भविष्य पर सवाल
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जर्मनी की थिसेनक्रुप कंपनी के स्टील डिवीजन को भारत की जिंदल स्टील इंटरनेशनल को बेचने की बातचीत अटक गई है। थिसेनक्रुप के डिप्टी सुपरवाइजरी बोर्ड चेयरमैन जुरगेन कर्नेर ने यह जानकारी दी। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि यह सौदा पूरा नहीं हो पाएगा। जिंदल कंपनी अक्टूबर से थिसेनक्रुप की स्टील यूनिट की जांच कर रही है।
जर्मनी की थिसेनक्रुप (Thyssenkrupp) कंपनी के स्टील डिवीजन को भारत की जिंदल स्टील इंटरनेशनल ( Jindal Steel International ) को बेचने की बातचीत अटकी हुई है। थिसेनक्रुप के डिप्टी सुपरवाइजरी बोर्ड चेयरमैन जुरगेन कर्नेर (Juergen Kerner) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इससे यह डर बढ़ गया है कि यह लंबे समय से चल रहा सौदा शायद पूरा न हो पाए।
जुरगेन कर्नेर, जो जर्मनी के IG Metall ट्रेड यूनियन के भी डिप्टी हेड हैं, ने बताया कि मजदूरों के प्रतिनिधियों ने जिंदल को एक विस्तृत प्रश्नावली दी थी। जिंदल अक्टूबर से थिसेनक्रुप के स्टील यूनिट की जांच कर रही थी। कर्नेर ने कहा कि उनसे जवाब का वादा किया गया था, लेकिन बार-बार टाल दिया गया। ऐसा लगता है कि थिसेनक्रुप एजी ( Thyssenkrupp AG ) और जिंदल के बीच बातचीत उम्मीद से ज्यादा लंबी खिंच रही है।कर्नेर ने कहा, "तो चीजें आगे नहीं बढ़ रही हैं, और यह अच्छी बात नहीं है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि मजदूर "महीनों तक अनिश्चितता में नहीं रह सकते"। यह डील थिसेनक्रुप के लिए बहुत अहम है, क्योंकि कंपनी अपने स्टील डिवीजन को बेचना चाहती है।
यह डील अगर पूरी नहीं होती है, तो थिसेनक्रुप के कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। मजदूर नेता इस बात से परेशान हैं कि उन्हें कब तक इस अनिश्चितता में रहना पड़ेगा। जिंदल कंपनी इस डील के लिए काफी समय से जांच कर रही है।