लेखन से मिली ख्याति

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आयरलैंड के ओलिवर गोल्डस्मिथ का बचपन मुश्किलों में बीता। चेचक के कारण चेहरे पर दाग और स्कूल में मंदबुद्धि समझे जाने से वे हताश थे। बांसुरी की धुन ने उन्हें अपनी खूबी पहचानी। शिक्षा, चिकित्सा, वकालत में असफल होने के बाद उन्होंने लेखन शुरू किया। घोर गरीबी में लिखी 'द विकर ऑफ वेकफील्ड' ने उन्हें विश्वप्रसिद्ध बनाया।

oliver goldsmith the story of becoming world famous through writing after overcoming struggles

आयरलैंड में 1728 में जन्मे ओलिवर गोल्डस्मिथ का बचपन संघर्षों से भरा था। उनके पिता पादरी थे। बचपन में चेचक के कारण उनके चेहरे पर दाग रह गए, जिससे बच्चे उनका मजाक उड़ाते थे। स्कूल में भी उन्हें मंदबुद्धि समझा जाता था । यह धारणा उनके मन में बैठ गई और वह असफल होने लगे। एक दिन उन्होंने बांसुरी अपने होंठों से लगाई। कुछ देर के प्रयास के बाद बांसुरी की मधुर धुन निकलने लगी, जिसने उन्हें मोहित कर दिया। उन्हें अहसास हुआ कि हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेषता होती है। बड़े होकर उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा और वकालत जैसे क्षेत्रों में प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। उसके बाद उन्होंने समय बिताने के लिए लेखन शुरू किया। शुरुआत में ‘हैक राइटर’ के रूप में काम किया। धीरे-धीरे उनकी रचनाएं प्रकाशित होने लगीं। घोर गरीबी में उन्होंने The Vicar of Wakefield लिखी, जिसके प्रकाशन में उनके मित्र सैमुअल जॉनसन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस कृति ने उन्हें विश्वप्रसिद्ध बना दिया और यह सिद्ध किया कि हर व्यक्ति का हुनर अलग होता है।