क्यों 3 साल में ही हेल्थ कवर छोड़ रहे युवा?

Contributed byमहंगा प्रीमियम?,क्या है वजह?|नवभारत टाइम्स

भारत में युवा हेल्थ इंश्योरेंस से दूरी बना रहे हैं। 24 से 34 साल के 55% युवा पॉलिसी शुरू होने के तीन साल के भीतर ही उसे बंद कर देते हैं। इसका मुख्य कारण प्रीमियम का महंगा होना और लोन का बोझ है। युवा इसे लंबे समय तक चलाने की गंभीरता नहीं दिखाते।

क्यों 3 साल में ही हेल्थ कवर छोड़ रहे युवा?
(फोटो- नवभारत टाइम्स)

NBT रिपोर्ट: भारत में हेल्थ बीमा खरीदने वाले 24 से 34 साल की उम्र के युवाओं में एक बड़ी समस्या देखी जा रही है। इनमें से आधे से ज्यादा लोग पॉलिसी शुरू होने के पहले तीन साल के भीतर ही उसे बंद कर देते हैं।

TOI के मुताबिक, Niva Bupa के एक सर्वे में सामने आया है कि इस उम्र के 55% लोग पॉलिसी को रिन्यू नहीं कराते हैं। वे खरीदारी के तीन साल के भीतर ही ऐसा कर देते हैं। इससे पता चलता है कि युवा शुरुआत में इसे आजमाने के तौर पर तो लेते हैं, लेकिन उनमें इसे लंबे समय तक चलाने की गंभीरता नहीं होती। पॉलिसी छोड़ने वालों की यह भारी संख्या बताती है कि बीमा खरीदने का फैसला अक्सर किसी छोटी अवधि की वजह से लिया जाता है, न कि भविष्य के जोखिमों को समझने के बाद। Niva Bupa के निमिष अग्रवाल का कहनान है कि सबसे खास बात यह है कि ये लोग एक कंपनी को छोड़कर दूसरी कंपनी के पास नहीं जा रहे हैं। वे असल में हेल्थ इंश्योरेंस की कैटिगरी से ही पूरी तरह बाहर निकल रहे हैं।

क्या है वजह? : पॉलिसी बंद करने की सबसे बड़ी वजह 'किफायती न होना' बताई गई है। पॉलिसी छोड़ने वाले 46% लोगों ने इसे ही मुख्य कारण माना। पॉलिसी छोड़ने वालों में से 66% लोगों पर पहले से ही कोई न कोई लोन चल रहा था, जिनमें 33% के पास पर्सनल लोन और 17% के पास होम लोन था।

युवा पॉलिसीधारकों का एक बड़ा हिस्सा इसलिए भी बीमा छोड़ देता है क्योंकि उन्हें इस प्रोडक्ट (पॉलिसी) से कोई खास फायदा महसूस नहीं होता।

महंगा प्रीमियम? : ऐसे मामलों में जब बजट तंग होता है, तो इंश्योरेंस प्रीमियम उन खर्चों में सबसे ऊपर होता है जिसमें कटौती की जाती है। लाइफ इंश्योरेंस के विपरीत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम हर साल बदलते हैं और उम्र बढ़ने के साथ इनकी कीमत भी बढ़ती जाती है। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए युवाओं को जोड़ना बहुत जरूरी है ताकि जोखिम को बांटा जा सके और बिजनेस चलता रहे, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ क्लेम की संख्या भी बढ़ती है।

वित्त वर्ष 2025 में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 9.1% बढ़कर 1.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, बीमा के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या सिर्फ 1.4% बढ़कर 58 करोड़ ही पहुंची है।