रघु राय की तस्वीरों में हवा भी क़ैद है

नवभारतटाइम्स.कॉम

प्रसिद्ध फोटोग्राफर रघु राय अब हमारे बीच नहीं हैं। उनकी तस्वीरें दिल्ली की आत्मा को दर्शाती हैं। उन्होंने दिल्ली की गलियों, स्मारकों और लोगों को अपने कैमरे में कैद किया। उनकी खींची गई तस्वीरें देश की राजधानी के बदलते स्वरूप को दिखाती हैं। इंदिरा गांधी के फटे पोस्टर की तस्वीर ने उन्हें खास पहचान दिलाई।

raghu rai the photographer who captured even the air in his photos

देश के मशहूर फोटोग्राफर रघु राय खान मार्केट के पीछे स्थित भारती नगर में रहते थे। पिछले रविवार को उनका निधन हो गया, लेकिन ग्राउंड फ्लोर के उस फ्लैट की दीवारों पर लगे 1960 के दशक की कई तस्वीरों के जरिये वह अब भी अमर हैं। रघु उन तस्वीरों की कहानी काफी दिलचस्प तरीके से सुनाते थे। वह बताते थे कि दिल्ली आने के बाद कैसे उन्होंने तस्वीरों के लिए यहां की गलियों की खाक छानी थी। अलग तस्वीरें निकालने का उनका जुनून ऐसा था कि वह घंटों पैदल चलते।

कैमरे में इतिहास । रघु राय की तस्वीरों से जीवंत दिल्ली की छवि दिखती है। उनकी किताबें- Delhi: A Portrait और Delhi, Contrasts & Confluences शहर की असल झलक दिखाती हैं। इनमें उन्होंने दिल्ली-6 से लेकर महरौली के खंडहर, स्मारक और दिल्ली में रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी को अपने कैमरे में कैद किया है। 1966 में हुमायूं के मकबरे के पास उनकी ली गई तस्वीर में गेहूं की खेती दिखती है। उस तस्वीर को देखकर यकीन ही नहीं होता कि देश की राजधानी कभी ऐसी रही होगी।

भव्यता से भरपूर । रघु को खंडहर और स्मारकों से खास लगाव था। उन्होंने हमेशा इसे एक अलग तरीके से दिखाया। उनकी तस्वीरों में सिर्फ स्मारक नहीं, वहां आने वाले लोग, रोशनी और हवा भी दिखती थी। 1986 में खींची गई राष्ट्रपति भवन की उनकी तस्वीर वहां की भव्यता दिखाती है। भले ही अग्रसेन की बावली अब सूख गई है, लेकिन 1967 में जब रघु ने उसे अपने कैमरे में उतारा, तब वहां पानी दिखता था।

अलग नजर । हाल के बरसों तक वह पुरानी दिल्ली की गलियों में कैमरा टांगे दिख जाते थे। वह संकरी गलियों में ठेले वालों, बुजुर्गों की तस्वीरें निकाला करते। उनकी फोटोग्राफी दिखाती है कि पुरानी दिल्ली सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि सांस लेता जीवित शहर है, जहां हर पल जीवन चलता रहता है।

भावनाओं से भरी । Delhi: A Portrait में खुशवंत सिंह के कंटेंट और रघु की तस्वीरें दिल्ली की आत्मा को दिखाती हैं। Delhi, Contrasts & Confluences की तस्वीरों में पुरानी और नई दिल्ली का मेल दिखता है। उनके कैमरे ने खंडहर और आधुनिक इमारतों को बखूबी उतारा है। उनकी तस्वीरों से पता चलता है कि दिल्ली बदल जरूर रही है, मगर इसकी जड़ें मजबूत हैं। भावनाओं से भरी उनकी तस्वीरों में रोशनी भी बयां होती थी।

जिससे मिली पहचान । 1977 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उनकी तस्वीर सुर्खियों में आई थी। इंदिरा गांधी के चुनाव हारने के बाद सफदरजंग फ्लाईओवर के पास की सड़क पर इंदिरा के फटे पोस्टर की तस्वीर ने रघु को एक अलग पहचान दी। द स्टेट्समैन अखबार ने उस तस्वीर को 6 कॉलम में छापा, जिसके बाद लोग कहने लगे कि रघु राय के रूप में देश और दुनिया को एक बेहतरीन फोटो जर्नलिस्ट मिल गया।