हरित ऊर्जा से विकास को मिल रही है तेज रफ्तार

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उत्तर प्रदेश हरित ऊर्जा को अपनाकर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। सौर ऊर्जा, कंप्रेस्ड बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल बिजली की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि लोगों की जिंदगी भी बेहतर हुई है। रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और महिलाएं भी सशक्त हो रही हैं।

uttar pradeshs development with green energy 1150 solar capacity growth and towards self reliance

देश ने विकसित भारत 2047 लक्ष्य के तहत जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाया है। यह संशोधित जलवायु एवं ऊर्जा संक्रमण, बिजली सुधार और पारिस्थितिकी संरक्षण पर केंद्रित है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश अपने विकास मॉडल में स्थिरता को शामिल कर रहा है।

हरित योजनाओं में आगे यूपी

सोलर एनर्जी, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), ग्रीन हाइड्रोजन पर जोर से प्रदेश हरित भविष्य की ओर बढ़ रहा है। पिछले 8 बरसों में राज्य की सौर क्षमता 1150% बढ़ी है और यह 2017 के 400 मेगावॉट से बढ़कर इस साल मार्च तक 5 हजार मेगावॉट से अधिक हो गई है। यह बदलाव सिर्फ मेगावॉट तक सीमित नहीं, बल्कि पहुंच, वहनीयता और विश्वसनीयता का भी है। विदेशी निवेश समझौते परिपक्व हरित नीति को दर्शाते हैं, जिसे बेहतर कानून व्यवस्था और मजबूत बुनियादी ढांचे का समर्थन मिल रहा है।

साल 2017 से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संरचनात्मक ऊर्जा परिवर्तन को प्राथमिकता दी है। लंबे समय तक अस्थिर आपूर्ति, ऊर्जा बहिष्कार और क्षेत्रीय असमानताओं से जूझते राज्य ने अब निर्णायक रूप से थर्मल और हाइड्रो इलेक्ट्रिसिटी पर निर्भरता घटाकर सोलर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों की ओर कदम बढ़ाए हैं। यह बदलाव केवल ऊर्जा नीति तक सीमित नहीं, बल्कि एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य की मजबूत नींव रखने का संकेत है।

जनता विकास की साझेदार

सरकार की सोच में भी बदलाव दिखता है। अब निवेशक, उद्यमी और घरों को सिर्फ करदाता नहीं, विकास का साझेदार माना जा रहा है। साल 2022 की सौर नीति में 2027 तक 22 हजार मेगावॉट का लक्ष्य रखा गया है। सब्सिडी और आसान प्रक्रियाओं के जरिये इसे बल मिल रहा है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश 1,524 मेगावॉट रूफटॉप क्षमता के साथ आगे हैं। पीएम कुसुम योजना से किसानों को सौर पंप मिल रहे हैं। बुंदेलखंड में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और सौर पार्क विकसित हो रहे हैं।

CBG प्राकृतिक गैस का भरोसेमंद विकल्प बन रही है। कृषि प्रधान उत्तर प्रदेश हर साल बड़ी मात्रा में अवशेष पैदा करता है। 2022 की बायोगैस नीति से भूमि उपलब्धता और आपूर्ति आसान हुई। साथ ही सब्सिडी भी मिल रही है। इसका लक्ष्य हर तहसील में एक बायोएनर्जी संयंत्र लगाने का है। इससे देश की करीब 50% आयातित गैस पर निर्भरता कम हो सकती है। गोरखपुर में ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन उद्योग से लेकर घरेलू उपयोग तक इसकी संभावनाएं दर्शाता है।

प्रदेश जलवायु कार्रवाई में भी अग्रणी है। जलवायु स्मार्ट ग्राम पंचायतें और 40 जिला योजनाएं वैज्ञानिक आधार पर बनी हैं। अमृत सरोवर योजना से जलाशय पुनर्जीवित हुए, भूजल बढ़ा। जल-जीवन-मिशन योजना वर्षा जल संचयन को आगे बढ़ा रही है, जबकि बुंदेलखंड में ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक से खेती में बदलाव आया है।

लोगों की जिंदगी हो रही बेहतर

उत्तर प्रदेश की ऊर्जा गाथा सिर्फ सौर पैनल या ट्रांसमिशन सुधार तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना है- आराम, सम्मान और रोजगार को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़कर हर व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंचाना। रूफटॉप सोलर से बिजली बिल में 90% तक कमी हुई है, जिससे परिवारों की बचत बढ़ी है। इसके अलावा, 60 हजार से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सेवाओं में नौकरी के अवसर मिले हैं। 93 हजार से अधिक किसानों को सौर पंप का लाभ मिला है, जिससे खेती को बढ़ावा मिला।

महिला और युवा ही इस बदलाव की असल ताकत हैं। डिसेंट्रलाइज्ड एनर्जी फॉर विमेंस इकनॉमिक एम्पावरमेंट (देवी) जैसी योजनाएं महिला उद्यमियों को सशक्त बनाती हैं। उन्हें वैकल्पिक ईंधन मिलता है और उनका काम आसान हो जाता है। 30 हजार युवाओं को सूर्य मित्र और महिलाओं को सौर दीदी बनाकर तकनीशियन, प्रबंधक और परिचालक की भूमिका के लिए तकनीकी रूप से दक्ष किया जा रहा है। जल जीवन मिशन में भी महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। बेहतर कौशल और समझ के कारण राज्य को जापान और सिंगापुर जैसे विदेशी निवेश व नए मौके मिल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश का हरित अभियान बाहरी निवेश आकर्षित करता है और भीतर आत्मनिर्भरता व स्थानीय मजबूती को बढ़ाता है। इससे प्रदेश राष्ट्रीय जलवायु और ऊर्जा लक्ष्यों का प्रमुख भागीदार बन रहा है।

(शहजाद पूनावाला BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और डॉ. विजेता रत्तानी सस्टेनेबिलिटी ऐंड डिवेलपमेंट स्पेशलिस्ट हैं)