‘तनाव, कच्चे तेल की कीमतें घटें, तभी बाजार में रौनक’

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वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय शेयर बाजार में अगले वित्तीय वर्ष में मजबूती की उम्मीद है। मौजूदा गिरावट बाहरी कारणों से है, देश की बुनियादी स्थिति मजबूत है। कंपनियों के अच्छे नतीजों और संस्थागत निवेश से बाजार को सहारा मिलेगा।

indian stock market expected to shine with falling crude oil prices and reduced tensions

पीटीआई, नई दिल्ली : अगर दुनिया में चल रहा तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें काबू में आती हैं, तो अगले वित्तीय वर्ष (FY27) में भारतीय शेयर बाजार की स्थिति काफी मजबूत और बेहतर रहने की उम्मीद है।

साल 2025-26 के दौरान सेंसेक्स 5,467.37 अंक (7%) लुढ़क गया, जबकि NSE का निफ्टी 1,187.95 अंक (5%) नीचे गिर गया। सिर्फ इसी महीने की बात करें, तो 28 फरवरी को पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से सेंसेक्स 9,339.64 अंक (11.48%) तक क्रैश हो चुका है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा ने कहा कि जैसे ही मौजूदा तनाव शांत होगा, भारतीय बाजार का भविष्य बेहतर नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि तब तक महंगाई और ब्याज दरों पर महंगे तेल का असर दिखेगा। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) द्वारा लगातार हो रहे निवेश और कंपनियों के अच्छे नतीजों की उम्मीद बाजार को ज्यादा नीचे गिरने से बचाएगी। साल के दूसरे हिस्से में बाजार में जोरदार सुधार देखने को मिल सकता है।

Enrich Money के सीईओ पोनमुडी आर. का कहना है कि बाजार में मौजूदा गिरावट की वजह बाहरी है, न कि हमारे देश की बुनियादी स्थिति खराब है। Livelong Wealth के हरिप्रसाद के मुताबिक, बाजार में सुधार कंपनियों की अर्निंग पर निर्भर करेगा। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के रवि सिंह ने कहा, अगर तेल की कीमतें और ब्याज दरें घटती हैं, तो बाजार फिर से रफ्तार पकड़ सकता है।