nNBT न्यूज, लखनऊ : शहर की बाहरी सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे में चल रहे अवैध ईंट-भट्टों के सर्वेक्षण मामले में नगर निगम की टालमटोल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदार राजपत्रित अधिकारियों को शनिवार को व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण के साथ तलब कर लिया है।
क्या है पूरा मामला? : यह आदेश दुर्गेश कुमार सिंह की ओर से वर्ष 2010 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। कोर्ट ने पिछली 14 जनवरी को ही नगर निगम को निर्देश दिए थे कि वह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ मिलकर संयुक्त टीम बनाए और नगर निगम सीमा से 5 किमी के दायरे में आने वाले सभी ईंट-भट्टों का सर्वे करे। गुरुवार को बोर्ड ने अदालत को बताया कि नगर निगम की ओर से इस संबंध में कोई सहयोग या जवाब नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर, नगर निगम ने सफाई दी कि टीम तो बनी थी, लेकिन सर्वे किन्हीं कारणों से नहीं हो सका।
अनदेखी पर सवाल : अदालत ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश ईंट-भट्टा नियमावली, 2012 के नियम 2(i) के तहत नगर निगम की बाहरी सीमा के 5 किलोमीटर के भीतर ईंट-भट्टों का संचालन प्रतिबंधित है। यह नियम 27 जून 2012 से ही प्रभावी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संचालन की अनुमति केवल पांच साल के लिए होती है, ऐसे में 2012 के बाद इन भट्टों के लाइसेंस नवीनीकरण पर विचार करना अनिवार्य है। कोर्ट ने सर्वे की स्थिति, अनुमति की वैधानिक स्थिति और स्थापना की तिथि का पूरा विवरण हलफनामे के जरिए पेश करने का आदेश दिया है।




