गीतकार और शायर गुलजार के बाद तमिल फिल्मों के गीतकार और साहित्यकार आर. वैरामुथु को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना खास है। यह सिर्फ भारतीय साहित्य और सिनेमा के लिए नहीं, बल्कि हमारे जैसे पेशेवरों के लिए भी गर्व की बात है।
विविधता का सम्मान । भले ही वैरामुथु को ज्ञानपीठ से नवाजा जा रहा है, लेकिन तमिलनाडु में उनकी पहचान हमेशा फिल्म गीतकार के रूप में रही। तमिल की साहित्यिक दुनिया में उन्हें कम महत्व मिला, लेकिन सिनेमा ने उन्हें अपार ख्याति दी। उनका पहला गीत 1980 की फिल्म निझालगल के लिए एसपी बालासुब्रमण्यम ने गाया था। संगीत इलैयाराजा का था। उन्होंने अब तक 10 हजार से ज्यादा गाने लिखे हैं। उनके गीतों में भाव, कविता और संगीत का अनोखा मेल है, जिसने तमिल फिल्मी गीतों की परंपरा में नई दिशा और युग का प्रतिमान स्थापित किया है।
बुनियादी खूबी भी । कई लोग उनकी राजनीतिक नजदीकियों की भी चर्चा करते हैं। लेकिन, वैरामुथु का संपूर्ण लेखन उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रमाणित करता है। उनके लिखे गाने सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं हैं - वे जीवन, समाज और भावनाओं को भी गहराई से छूते हैं। वैरामुथु का उपन्यास ‘कल्लीकाट्टु इतिहासम’ साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत है। इसका हिंदी अनुवाद ‘नागफनी वन का इतिहास’ एच. बालसुब्रमण्यम ने किया है। सामाजिक सरोकार और भाषा की दृष्टि से यह 20वीं सदी के भारत के प्रतिनिधि उपन्यासों में शामिल होने योग्य है। इसकी गद्य शैली की ताकत हर हिंदी पाठक को पढ़ने लायक बनाती है।
विवादों से नाता । वैरामुथु पर MeToo आंदोलन के समय 17 महिलाओं ने आरोप लगाए थे। तब उन्होंने कहा था कि वह कानून का सामना करने के लिए तैयार हैं। आज भी संकट के बादल उनके उज्ज्वल करियर पर मंडराते हैं। लेफ्ट के महिला संगठन AIPWA ने तो इस आधार पर ज्ञानपीठ पुरस्कार रद्द करने तक की मांग की।
पुरस्कार का विरोध । इससे पहले, गुलजार को भी ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने पर कुछ लोगों ने नाक-भौं सिकोड़े थे। अब वैरामुथु को तमिल साहित्य में यह सम्मान मिलने पर प्रतिक्रियाएं आई हैं। 2018 से ही तमिलनाडु का एक वर्ग उन्हें ज्ञानपीठ दिलाने के लिए लॉबिंग कर रहा था, जबकि तमिल साहित्यकारों विरोध के लिए हस्ताक्षर अभियान चला रहा था। पुरस्कार की घोषणा बाद अमेरिका में रहने वाले तमिल लेखक बी. जय मोहन ने ज्ञानपीठ कमिटी को पत्र लिखकर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा है कि वैरामुथु न तो कवि हैं और न लेखक, वह सिर्फ एक फिल्म लिरिसिस्ट हैं। उनको पुरस्कार मिलना तमिल साहित्य का अनादर है।
(लेखक हिंदी सिनेमा के गीतकार और कथाकार हैं)




