अथ मूर्ख कथा

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सुशासन पर व्यंग्य करती यह कथा मूर्खता को उत्सव मानने की प्रवृत्ति पर प्रकाश डालती है। सुखनंदन बताते हैं कि कैसे नेतृत्व के गुण अब अवगुण बन गए हैं। अभिमान, क्रोध, कुतर्क जैसे लक्षण प्रबंधन संस्थानों में सिखाए जा रहे हैं। यह स्थिति देश के भविष्य पर चिंता व्यक्त करती है।

from april fool to murkhistan satire on good governance where vices become leadership qualities

सुधर्मा के फोन में एक मेसेज गिरा और चेहरे के भाव बदल गए। 'जयचंद ने मुझे अप्रैल फूल बना दिया।' सुधर्मा ने पति को मेसेज दिखाया, लेकिन सुखनंदन का चेहरा भावहीन। लंबी सांस लेकर बोले, 'यह उत्सव नहीं अपमान है। तुमने मेसेज कुछ और समझ देखा, उसमें था कुछ और। अगर यह मूर्ख बनना है, तो सुशासन की नींव ही दरक जाएगी। तब तो साल के 365 दिन एक ही आयोजन को समर्पित हैं, क्योंकि कहना कुछ और करना कुछ तो हमारा विजन डॉक्युमेंट है। इसे तैयार करने में अरबों खर्च व महीनों ऑनलाइन सर्च हुआ है।'

सुधर्मा का असमंजस भाव देख सुखनंदन ने इसे और विस्तार दिया, 'कहते हैं, इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी ने 32 मार्च को सगाई घोषित कर दी। राजा पर विश्वास कर जनता उत्सव और दावत की लाइन में लग गई। फिर ध्यान आया कि ऐसी तारीख ही नहीं होती। यहीं से मूर्ख दिवस शुरू हुआ। अंग्रेजों को एक बार लाइन लगानी पड़ी तो उन्होंने इसे मूर्खता करार दे दिया, इधर हम सात दशक से लाइन में खड़े हैं और इसे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य समझते हैं। शीर्ष से लेकर धरातल तक सिनेमाई गर्व बोध से भरा है कि हम जहां खड़े होते हैं, लाइन वहीं से शुरू होती है।'

'शास्त्र कहते हैं कि मूर्ख के पांच लक्षण हैं - अभिमान, दुर्वचन, क्रोध, कुतर्क, दूसरों का अनादर। अब यह नेतृत्व का अनिवार्य गुण है। अभिमान Attitude है, दुर्वचन Sharpness, क्रोध Boldness है, कुतर्क Aggressiveness और अनादर है Firmness। पहले जिन अवगुणों को भुलाने का प्रशिक्षण दिया जाता था, अब उन्हें सिखाने के लिए प्रबंधन संस्थान खुले हैं। अब तुम ही बताओ जो हमारे भरोसे का आधार है, नीति का विस्तार है, उसे कोई अवगुण का उत्सव कहे तो अच्छा लगेगा?' सुखनंदन ने बात खत्म की।

नेपथ्य में काका हाथरसी की कविता गूंज रही थी, 'मिटा देंगे सबका नामो-निशान, बना रहे हैं नया राष्ट्र ‘ मूर्खिस्तान ... राष्ट्रीय पशु होगा गधा...।'