NBT न्यूज, चंडीगढ़
हरियाणा सरकार के निर्देश पर विश्वविद्यालयों के तीन मौजूदा वाइस चांसलरों और एक पूर्व वाइस चांसलर के विरूद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत आंतरिक जांच शुरू हो गई है। यह जांच उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा की जा रही है। यह पहला मौका है जब एक साथ प्रदेश के चार विश्वविद्यालयों में की जांच शुरू हुई है। यह जांच पैसों की हेराफेरी, भर्तियों में नियमों का उल्लंघन आदि समेत कई शिकायतों के आधार पर हुई है। राज्य सरकार के पास इस संबंध में लगातार शिकायतें आ रही थी।
विजिलेंस ब्यूरो और एसीबी के चीफ अर्शिंदर सिंह चावला ने विजिलेंस जांच की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देशों के बाद आंतरिक जांच की जा रही है। जांच में रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और श्री कृष्णा आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र शामिल हैं। एमडीयू में पूर्व वाइस-चांसलर राजबीर सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें उनके कार्यकाल के दौरान 20,000 पौधों की खरीद में गड़बड़ी और नियुक्तियों में अधिकार का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था। जीजेयू में वाइस-चांसलर प्रोफेसर नरसी राम पर भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप हैं, खासकर नॉन-टीचिंग स्टाफ से जुड़ी भर्ती में। सरकार ने जांच की सिफारिश की है।
डीक्रस्ट मुरथल में हो रही जांच स्टूडेंट फंड से लगभग 50 करोड़ रुपये के कथित गबन से जुड़ी है।
आरोप है कि फंड का फिक्स्ड डिपॉजिट ज़्यादा रिटर्न देने वाले सरकारी बैंक में रखने के जगह दो साल के लिए कम इंटरेस्ट रेट पर एक प्राइवेट बैंक में डायवर्ट कर दिया गया, जिससे काफी वित्तीय नुकसान हुआ। यह शिकायत एक छात्र की तरफ से की गई थी। एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी ने पहले ही इस मामले की जांच कर ली थी और यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।



