पीटीआई, नई दिल्ली: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार मार्च के महीने में सुस्त पड़ गई और यह चार साल के निचले स्तर पर आ गई है। गुरुवार को जारी एक मंथली रिपोर्ट के मुताबिक, लागत में बढ़ोतरी, कड़ी प्रतिस्पर्धा, बाजार में अनिश्चितता और पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध की वजह से नए ऑर्डर और उत्पादन में कमी देखी गई है।
HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) फरवरी के 56.9 से गिरकर मार्च में 53.9 पर आ गया। यह पिछले करीब चार सालों में कारोबारी स्थितियों में सबसे कम सुधार को दर्शाता है। PMI का 50 से ऊपर होना बढ़ोतरी, जबकि 50 से नीचे होना गिरावट का संकेत है। HSBC की चीफ इंडिया इकॉनमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि यह जून 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। पश्चिम एशिया के तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और भारतीय मैन्युफैक्चरर्स भी इससे अछूते नहीं हैं।




