Saurabh.Yadav
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n नोएडा : यूपी एंटी टेरेरिजम स्क्वॉड ( ATS ) की कार्रवाई में लखनऊ से पकड़े गए आतंकी गतिविधियों में शामिल ग्रेनो के दोनों युवकों को गूगल लोकेशन भेजकर प्रतिष्ठित संस्थानों और वाहनों की रेकी कराई जाती जाती थी। गिरोह के मास्टरमाइंड के पास पाकिस्तानी हैंडलर द्वारा संस्थानों की गूगल लोकेशन भेजी जाती थी। वहीं ये लोग आतंकियों से सिग्नल ऐप के जरिए बातचीत करते थे, जिससे उनके बारे में किसी को पता न चल सके। आरोपी विडियो बनाने के बाद टेलीग्राम से मास्टरमाइंड को भेजते थे। इसके बाद वह पाकिस्तान में बैठे आकाओं को विडियो भेजकर क्यूआर कोड के जरिए रुपये लेता था। शुक्रवार को लखनऊ एटीएस ने चार युवकों को गिरफ्तार किया था, जिनमें दो मेरठ और दो गौतमबुद्ध नगर के निवासी शामिल हैं।
बातचीत के लिए सिग्नल ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे
आरोपी आतंकियों से बातचीत के लिए सिग्नल ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे चैट को ट्रैक करना मुश्किल होता है। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन में टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी कट्टरपंथी समूहों से जुड़े होने के सबूत भी मिले हैं। एटीएस के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल फोन से अफगानिस्तान के कई संदिग्ध नंबर भी मिले हैं, जिनसे बातचीत के संकेत हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड मेरठ का रहने वाला साकिब उर्फ डेविल है।
लोकेश ने अपने दोस्त विकास को भी शामिल किया
साकिब ने लोकेश उर्फ पपला पंडित से सोशल मीडिया से संपर्क किया। इसके बाद साकिब ने लोकेश को प्रतिष्ठित संस्थानों की रेकी करने, फोटो और आगजनी के विडियो भेजने पर रुपये देने का लालच दिया। पैसे के लालच में लोकेश इस नेटवर्क में शामिल हो गया। बाद में लोकेश ने अपने दोस्त विकास को भी इस गिरोह में जोड़ लिया। इसके बाद दोनों मिलकर भेजे गए गूगल लोकेशन के आधार पर अलग-अलग स्थानों की रेकी करने लगे।





