NBT रिपोर्ट, गुड़गांव
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। इस वार्ता के विफल रहने से होर्मुज को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसका सीधा असर गुड़गांव के उन निर्यात पर पड़ता नजर आ रहा है, जो खाड़ी देशों के बाजार पर काफी हद तक निर्भर है। बातचीत विफल होने के बाद इस रूट पर तनाव बढ़ने की आशंका है, जिससे कमर्शल शिपिंग प्रभावित हो सकती है। अभी इसका सबसे अधिक प्रभाव गारमेंट सेक्टर के निर्यात पर पड़ रहा है। इसका असर गुड़गांव के उन उद्योगों पर पड़ रहा है, जो खाड़ी देशों को गारमेंट्स, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। उद्योग जगत को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से हालात सामान्य होंगे और शिपिंग व्यवस्था पटरी पर लौटेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। पहले से ही कई शिपिंग सेवाएं प्रभावित हैं और अब इस मार्ग पर जोखिम बढ़ने से स्थिति और जटिल होती जा रही है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन दीपक मैनी का कहना है कि यदि समुद्री मार्ग बाधित रहता है तो माल की आपूर्ति में देरी होगी। इससे न केवल समय पर ऑर्डर पूरे करना मुश्किल होगा, बल्कि विदेशी खरीदारों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है। गुड़गांव में लगभग 400 ऐसे गारमेंट एक्सपोर्टर हैं जो खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा तो भारी समस्या हो सकती है।
उद्योग विहार इंडस्ट्रीज असोसिएशन के अध्यक्ष अनिमेश सक्सेना का कहना है कि गुड़गांव के गारमेंट सेक्टर के उद्योगों में पहले ही तैयार माल के अटकने और नई खेप भेजने में दिक्कत आ रही हैं। ऐसे में कैश फ्लो पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों के सामने चुनौती बनता जा रहा है।



