इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी वित्तीय सहायता है। पात्र लाभार्थियों को घर बनाने के लिए कुल 2.50 लाख रुपये की मदद दी जाती है। इसमें 1.50 लाख रुपये केंद्र सरकार और 1 लाख रुपये राज्य सरकार देती है। सरकार ने मकानों के आकार को भी तय किया है, ताकि हर परिवार को न्यूनतम सुविधाओं के साथ सम्मानजनक जीवन मिल सके। मकान का कार्पेट एरिया 30 से 45 वर्ग मीटर के बीच रखा गया है, जिससे छोटे लेकिन मजबूत और सभी मौसमों के अनुकूल घर तैयार किए जा सकें। 2025-26 और 2026-27 के लिए क्रमशः 704.45 लाख और 772.85 लाख रुपये का बजट तय किया गया है। राज्य के 87 शहरी निकायों और 3 विकास प्राधिकरणों में 32 सिटी लेवल टेक्निकल सेल क्लस्टर बनाए जाएंगे। पीएमएवाई-यू 2.0 को 1 सितंबर 2024 से लागू किया गया था




