n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : यूपी रेरा में जो प्रॉजेक्ट रजिस्टर्ड नहीं हैं, उनके आवंटी भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए यूपी रेरा ने फॉर्म-एम जारी कर दिया है। ऐसे प्रॉजेक्ट्स के आवंटी इस फॉर्म में मांगी गई जानकारियां भरकर वाद दायर करेंगे और उसके बाद रेरा की पीठ सुनवाई करेगी। इसके तहत सबसे पहले यह देखा जाएगा कि प्रॉजेक्ट रजिस्टेशन के लायक है या नहीं? अगर रजिस्ट्रेशन के मानक पूरे हैं तो प्रॉजेक्ट को पहले रजिस्टर्ड किया जाएगा और उसके बाद सुनवाई शुरू होगी। यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी के मुताबिक बड़े पैमाने पर अनरजिस्टर्ड प्रॉजेक्ट के आवंटियों की शिकायत मिल रही थी, जिसे देखते हुए यह फैसला किया गया है।
यूपी रेरा की तरफ से फॉर्म-एम जारी करने के साथ ही सुनवाई से जुड़े दिशा निर्देश भी दिए गए हैं। इसके मुताबिक पीड़ित व्यक्ति अनरजिस्टर्ड प्रॉजेक्ट के प्रमोटर, एजेंट या डिवेलपर के खिलाफ वाद दायर कर सकता है। इसके लिए फॉर्म-एम भरने के साथ ही उसमें मांगे गए दस्तावेज मुहैया करवाना होगा। रेरा के पोर्टल पर ऐसे प्रॉजेक्ट्स या उससे जुड़ी कोई जानकारी नहीं होती लिहाजा उनके प्रमोटर्स और एजेंट समेत सभी पक्षों को नोटिस भेजना संभव नहीं होता। लिहाजा फॉर्म एम के जरिए शिकायत दायर करते समय आवंटी को प्रमोटर से जुड़ी जानकारियां भी देनी होंगी। इसमें प्रमोटर का नाम, पता, प्रॉजेक्ट की लोकेशन, पिन नंबर, कंपनी की वेबसाइट, ई-मेल, कार्यालय का पता, प्रमोटर के मकान का पता, फोन नंबर, प्रॉजेक्ट से जुड़ी कंपनी के चेयरमैन, डायरेक्टर, पार्टनर समेत सभी पदाधिकारियों का नाम, पता और मोबाइल नंबर भरना होगा।
इसके बाद यूपी रेरा की बेंच प्रॉजेक्ट के मानचित्र और ले-आउट समेत जरूरी दस्तावेज की जांच करेगी और सभी मानक पूरे होने पर उसे रेरा में रजिस्टर्ड करेगी। इसके बाद आवंटियों की बुकिंग एप्लिकेशन, अलॉटमेंट लेटर, ऑफर ऑफ पजेशन, पजेशन सर्टिफिकेट, भुगतान के सुबूत के तौर पर बैंक रसीद, चेक डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी भी देनी होगी।



