NBT न्यूज, चंडीगढ़
हरियाणा में करीब पांच हजार कर्मचारियों की नौकरी पर लटकी तलवार हट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने करीब आठ साल पहले हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। 16 जून 2014 और 18 जून 2014 को अधिसूचित पालिसी को सही मानते हुए कर्मचारियों के नियमितीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई है। 7 जुलाई 2014 को अधिसूचित पालिसी को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया गया है।
इस पॉलिसी के तहत 31 दिसंबर 2018 तक 10 साल पूरे करने वाले 14000 अतिथि अध्यापकों, 3000 बिजली कर्मचारियों और 3000 दूसरे विभागों के कर्मचारियों को नियमित किया जाना था।
दरअसल तत्कालीन हुड्डा सरकार ने वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तीन पॉलिसी बनाई थी। जून में अधिसूचित पॉलिसी में निर्णय लिया गया कि 30 जून 2014 को जिन कर्मचारियों को काम करते हुए तीन साल पूरे हो जाएंगे, उन्हें पक्का किया जाएगा। इस पॉलिसी के दायरे में आने वाले करीब 5000 कर्मचारियों को पक्का कर दिया गया। सात जुलाई 2014 को बनाई अन्य पॉलिसी में व्यवस्था की गई कि 31 दिसंबर 2018 को जिन कर्मचारियों को 10 साल पूरे हो जाएंगे, उन्हें नियमित कर दिया जाएगा।
हरियाणा में सरकार बदलते ही इस पॉलिसी को हाई कोर्ट में चुनौती दी दी गई। हाईकोर्ट ने इसे बैकडोर एंट्री बताते हुए तीनों पॉलिसी रद्द करते हुए कर्मचारियों के नियमितीकरण पर रोक लगा दी थी। फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया, इन कर्मचारियों को पदोन्नति भी दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नियमित किए गए जो कर्मचारी सेवा में बने हुए हैं, उनकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।


