सोमवार को प्रकाशित NBT का संपादकीय ‘चिंता बढ़ी’ वैश्विक हालात पर सारगर्भित टिप्पणी है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया वार्ता का बेनतीजा रहना शांति के लिए चिंताजनक है। अविश्वास और कड़े रुख के कारण परमाणु मुद्दे तथा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर सहमति नहीं बन सकी। ट्रंप के आक्रामक कदमों और इस्राइली हमलों ने तनाव और बढ़ाया है। हालांकि 1979 के बाद पहली बार हुई सीधी वार्ता ने कूटनीति की क्षीण उम्मीद जरूर जगाई है। ऐसे में दोनों पक्षों को जिद छोड़कर लचीलापन दिखाना चाहिए। सैन्य विकल्पों के बजाय संवाद, विश्वास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही समाधान का रास्ता है। -अमृतलाल मारू ‘रवि’, ईमेल से




