सम्राट को सिंहासन

नवभारतटाइम्स.कॉम

बिहार को नया मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मिला है। उन्हें नीतीश कुमार से बेहतर शासन चलाने और जनता की उम्मीदें पूरी करने की चुनौती होगी। यह भाजपा के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। नीतीश कुमार ने सड़कों, बिजली और लड़कियों की शिक्षा में अच्छा काम किया था। लेकिन उन पर नए विचारों की कमी का आरोप लगा।

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बिहार के अगले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने ‘सुशासन बाबू’ नीतीश कुमार से बेहतर राजकाज चलाने और राज्य की 14 करोड़ जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने की चुनौती होगी। यह BJP के लिए भी अग्निपरीक्षा होगी, जिसे राज्य में पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली है।

नया आइडिया नहीं । नीतीश के करीब दो दशक के कार्यकाल के बड़े हिस्से से लोग खुश रहे। सड़क, बिजली, कानून-व्यवस्था और खासतौर पर लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने सराहनीय काम किए। लेकिन इसके बाद ऐसे आरोप लगे कि उनके पास राज्य को आगे ले जाने का कोई नया आइडिया नहीं है।

सहयोगियों का साथ । बिहार के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट का नाम सबसे आगे था। लेकिन यह भी खबर आई थी कि उनके नाम पर BJP और RSS के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। हालांकि, BJP विधायक दल की ओर से नेता चुने जाने के बाद इस सवाल का जवाब मिल गया है। NDA के सहयोगी दल पहले से सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के हक में थे।

नीतीश का आधार । सम्राट OBC में कुशवाहा जाति से आते हैं और पिछले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्मी जाति से। इन दोनों जातियों का बिहार में लंबे समय से समर्थन NDA को मिला हुआ है। यूं तो इन दोनों जातियों के 7% के करीब वोट हैं, लेकिन नीतीश ने अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को बड़े पैमाने पर अपने साथ जोड़ा था। इसलिए कहा जाता है कि राज्य में करीब 20% मतदाता नीतीश के साथ हैं। सम्राट पर BJP के कोर वोट बैंक के साथ आगे इस मतदाता समूह को भी साथ बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।

रेवड़ी कल्चर । जब RJD के लालू प्रसाद यादव से सत्ता नीतीश कुमार के हाथों में आई थी, तब बिहार सड़क-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से ग्रस्त था। नीतीश ने इन बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनता की आकांक्षाएं पूरी कीं। लेकिन पिछले चुनाव में जीविका दीदियों को उनकी सरकार ने मतदान से पहले 10,000-10,000 रुपये की सहायता राशि दी। तब उन पर चुनाव जीतने के लिए रेवड़ी कल्चर का सहारा लेने का आरोप लगा।

पलायन का दंश । इन चुनावों में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पलायन को बड़ा मुद्दा बनाया था। भले ही उन्हें बहुत वोट नहीं मिले, लेकिन बिहार के लोगों में इसकी काफी कसक है। उन्हें राज्य में रोजगार नहीं मिलता, इसलिए उन्हें घर-बार छोड़ना पड़ता है। बिहार के लोगों की चाहत है कि उनका राज्य विकास की दौड़ में आगे निकले और विकसित भारत के सपने के साथ विकसित बिहार का सपना भी साकार हो।