n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
जिले में हीमोफीलिया के खिलाफ लड़ाई में अब फोकस सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग जेनेटिक काउंसलिंग , स्क्रीनिंग, व्यापक जागरूकता, अर्ली डिटेक्शन और समय पर जांच के जरिये इस आनुवांशिक बीमारी के फैलाव को रोकने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस पहल में महिलाओं की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि वे इस बीमारी की कैरियर होकर अगली पीढ़ी तक जीन ट्रांसफर कर सकती हैं।
शहर में चल रहे अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग काउंसलिंग कैंप, जांच और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिये न सिर्फ नए मरीजों की पहचान कर रहा है, बल्कि चिह्नित मरीजों को समय पर उपचार और सरकारी सुविधाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। विभाग का मानना है कि सही समय पर दी गई जानकारी और परामर्श से हीमोफीलिया के नए मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है। डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज हरियाणा, डॉ. ब्रह्मदीप सिंधू के अनुसार लोगों को इस बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है और चिन्हित मरीजों को दवाएं व उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे समय पर इलाज सुनिश्चित हो सके।
महिलाएं हो सकती हैं कैरियर: आमतौर पर हीमोफीलिया को पुरुषों की बीमारी माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाएं इसके जीन की कैरियर हो सकती हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल के हीमेटोलॉजी के प्रिंसिपल डायरेक्टर एंड चीफ डॉ. राहुल भार्गव ने बताया कि महिलाओं में लक्षण नहीं दिखते, फिर भी वे बीमारी को आगे बढ़ा सकती हैं। ऐसे में जेनेटिक स्क्रीनिंग और काउंसलिंग बेहद जरूरी हो जाती है। इसके साथ ही लोगो को फैक्टर VIII और IX की भूमिका समझना भी बेहद जरूरी है।



