स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर नियामक आयोग सख्त, पावर कॉरपोरेशन से 10 दिन में मांगा जवाब

नवभारतटाइम्स.कॉम

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में सख्त हो गया है। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से दस दिनों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड का विकल्प मिल सकता है। उपभोक्ता परिषद ने बिजली कंपनियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। आयोग ने कंपनियों को चेतावनी दी है।

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n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की अर्जेंसी एप्लिकेशन पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट देने से पहले पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड का विकल्प दे सकता है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अ वधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की सभी बिजली कंपनियां विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5), भारत सरकार और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के निर्देशों का उल्लंघन कर रही हैं। आरोप है कि कॉस्ट डेटा बुक के अध्याय-4 ‘सिक्यॉरिटी’ की गलत व्याख्या कर नए बिजली कनेक्शन सिर्फ प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं और पुराने पोस्टपेड कनेक्शन भी उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रीपेड में बदले जा रहे हैं।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह फैसला उपभोक्ताओं के हित में बड़ी राहत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनियां भ्रामक जवाब देती हैं या नियमों का उल्लंघन जारी रखती हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।