'राम मंदिर परिसर में ज्योतिस्वरूप कलाकृति अक्षम्य'

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अयोध्या राम मंदिर में स्थापित 'ज्योतिस्वरूप' कलाकृति पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे परंपराओं के विरुद्ध बताया है। शंकराचार्य ने ट्रस्ट से गर्भगृह के स्थान और वास्तविक ज्योति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

shankaracharya objects to jyotiswaroop artwork in ram mandir writes letter to trust

nNBT न्यूज, वाराणसी : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अयोध्या में स्थापित ‘ज्योतिस्वरूप’ कलाकृति पर आपत्ति जताते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र लिखा है। उन्होंने इसे शास्त्रीय मर्यादाओं और परंपराओं के विरुद्ध अक्षम्य त्रुटि करार दिया।

शंकराचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि का हर कण पूजनीय है, विशेषकर वह स्थान जहां पूर्व में गुंबद था और लंबे समय तक चल विग्रह स्थापित रहा। उन्होंने ट्रस्ट से पूछा कि क्या वर्तमान मंदिर का गर्भगृह मूल जन्मस्थान से अलग बनाया गया है। यदि ऐसा है तो यह शास्त्रसम्मत नहीं है, क्योंकि गर्भगृह का स्थान बदला नहीं जा सकता। वहीं, पीतल की ‘ज्योतिस्वरूप’ कलाकृति पर कहा कि केवल ज्वाला का आकार देने से वह ज्योति नहीं बन जाती। ट्रस्ट से स्थिति स्पष्ट करने और वास्तविक ज्योति की मांग उठाई है।

3 मई को गोरखपुर से शुरू होगी गो रक्षा यात्रा : गोमाता को राष् ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए शंकराचार्य स् वामी अविमुक् तेश् वरानंद 3 मई को गोरखपुर से गो रक्षा यात्रा शुरू करेंगे। यात्रा प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होते हुए 81 दिन बाद 24 जुलाई को लखनऊ पहुंच संपन्न होगी। संयोजक स् वामी प्रत् यक् चैतन् य मुकुंदानंद गिरी के अनुसार यात्रा के दौरान सभाएं भी होंगी।