Ranvijay.Singh1
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लखनऊ : रोजगार की तलाश में नोएडा जैसे बड़े शहरों में आने वाले श्रमिकों को किराए पर सस्ते और किफायती आवास मिल सकेंगे। इसके लिए पीएम आवास योजना की किफायती किराया आवास (एआरएच) पॉलिसी को आद्योगिक विकास विभाग में भी लागू किया जाएगा। शासन स्तर पर आवास, इंडस्ट्री, नगर विकास और यूपी नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारियों की बैठक में इसपर सहमति बनी। तय हुआ कि इंडस्ट्रीज के भीतर 30 फीसदी हिस्से पर श्रमिकों के लिए आवास बनेंगे, जो उन्हें किफायती दर पर रहने को दिया जाएगा। इसके अलावा विकास प्राधिकरण स्तर से महानगरों में किफायती किराया आवास बनाकर उन्हें किराए पर दिए जाएंगे। महानगरों में आने वाले मजदूर, वेंडर, पेंटर, प्लंबर और इलेक्ट्रिशन समेत कुशल या अकुशल श्रमिकों को यह मकान मामूली दर पर रहने के लिए दिए जाएंगे और जब वो शहर छोड़कर जाएगा तो मकान खाली करवाकर दूसरे जरूरतमंद श्रमिक को किराए पर दे दिया जाएगा।
यूपी कैबिनेट ने पिछले महीने आवास विभाग के लिए पीएम आवास के तहत किफायती किराया आवासों की पॉलिसी को मंजूरी दी थी। हालांकि, इंडस्ट्री विभाग में इसे लागू नहीं किया गया था। शनिवार को शासन स्तर पर हुई बैठक में आवास विभाग की किफायती किराया आवासों को औद्योगिक विकास विभाग में भी लागू करने का फैसला हुआ। इसके तहत अब इंडस्ट्री विभाग अपनी योजना में श्रमिकों के लिए इस नीति के तहत मकान या फ्लैट बनवाएगा। इसके अलावा महानगरों में विकास प्राधिकरण या आवास विकास की तरफ से ऐसे मकान या फ्लैट्स का निर्माण होगा।
सूत्रों की मानें तो इसके लिए पिछले महीने ही प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के अध्यक्ष, विनियमित क्षेत्र के नियंत्रक प्राधिकारी और आवास विकास परिषद के कमिश्नर को पत्र भेजा जा चुका है। निजी डिवेलपर भी अपनी योजना में श्रमिकों के लिए किराए के आवास बना सकेंगे। इसके लिए उन्हें शासन स्तर से भू उपयोग, मानचित्र और विकास शुल्क समेत कई तरह की छूट दी जाएगी। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि श्रमिकों को उनके कार्यस्थल के आसपास ही सस्ते और किफायती आवास रहने के लिए मिल जाएंगे। इससे एक तरफ जहां उन्हें महंगे किराए से राहत मिलेगी, वहीं काम पर जाने का किराया भाड़ा भी बचेगा।
सूत्रों की मानें तो कोविड संक्रमण के दौरान श्रमिकों की समस्या विकराल हो गई थी। उस दौरान ही इंडस्ट्रियल एरिया में श्रमिकों के लिए आवास बनाने का मुद्दा उठा था। हालांकि, उस दिशा में प्रभावशाली तरीके से काम नहीं हो सका। अब नए सिरे से कवायद शुरू हो रही है।


