Sudha.Shrimali@
timesofindia.com
n मुंबई: शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और पिछले एक-दो साल में म्यूचुअल फंड ्स के नेगेटिव रिटर्न (नुकसान) ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में गिरावट देखकर कई निवेशक परेशान हैं। ऐसे माहौल में ओवरसीज फंड ऑफ फंड्स (FOFs) निवेशकों के बीच तेजी से चर्चा में आए हैं, क्योंकि इन फंड्स ने पिछले एक साल में जबरदस्त रिटर्न दिए हैं।
उदाहरण के तौर पर, एक्सिस म्यूचुअल फंड का ग्रेटर चाइना इक्विटी फंड ऑफ फंड पिछले एक साल में करीब 68% रिटर्न दे चुका है। वहीं एडलवाइस ग्रेटर चाइना ऑफशोर फंड ने करीब 72% का रिटर्न दिया है। निप्पोन इंडिया ताइवान फंड ने तो एक साल में लगभग 262% तक रिटर्न देकर निवेशकों को चौंका दिया। इसके अलावा फ्रैंकलिन एशियन इक्विटी फंड ने 45.5% और कोटक ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट ओवरसीज इक्विटी ओमनी FOF ने करीब 66.6% रिटर्न दिया है।
हालांकि एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। दूसरी ओर सबसे बड़ी चुनौती ओवरसीज निवेश पर RBI द्वारा तय की गई 8 बिलियन डॉलर की सीमा है। जैसे ही यह लिमिट पूरी होती है, म्यूचुअल फंड हाउस नए निवेश स्वीकार करना बंद कर देते हैं। बाद में जब कुछ निवेशक पैसा निकालते हैं या प्रॉफिट बुकिंग होती है, तब दोबारा निवेश की विंडो खुलती है। कई बार फंड हाउस केवल SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) ही स्वीकार करते हैं और लंपसम (एकमुश्त निवेश) बंद रखते हैं।
हाल ही में बाजार में आई गिरावट के बाद कुछ ओवरसीज FOFs ने फिर से निवेश स्वीकार करना शुरू किया है, जिससे निवेशकों के लिए मौका बना है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इन फंड्स में निवेश के फायदे और नुकसान क्या हैं, और निवेशक अपने पोर्टफोलियो को कैसे संतुलित करें।


