n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : प्रदेश के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में पाठ्यक्रम को जेंडर सेंसिटिव बनाया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उठाया गया है, जिसका उद्देश्य छात्राओं के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाना और माहवारी व किशोर स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना है।
विभाग की ओर से जारी आदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) से कहा गया है कि वह पाठ्यक्रम में जेंडर सेंसिटिव शिक्षा को शामिल करे। इसमें विशेष रूप से माहवारी, किशोरावस्था, प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को वैज्ञानिक और आयु उपयुक्त तरीके से पढ़ाया जाना शामिल है। पाठ्यक्रम में PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) और PCOD (Polycystic Ovarian Disease ) जैसी स्वास्थ्य चिंताएं, शारीरिक और मानसिक बदलावों से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी, ताकि छात्राएं समय पर सही जानकारी प्राप्त कर सकें। जेंडर सेंसिटिव पाठ्यक्रम से छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकेंगी। नए पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए हैं।


