n NBT न्यूज, फरीदाबाद
हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जाने को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। काउंसिल ऑफ भारतीय स्कूल एजुकेशन ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने हरियाणा के मुख्य सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी और जिला प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए 29 अप्रैल को सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए है।
हाल ही में हरियाणा प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के तहत फरीदाबाद सहित कई जिलों में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाया गया। इस निर्णय के बाद शिक्षकों में व्यापक असंतोष देखने को मिला। इसी के खिलाफ काउंसिल ऑफ भारतीय स्कूल एजुकेशन के चेयरमैन एडवोकेट डॉ. तरुण अरोड़ा ने याचिका दायर कर इस आदेश को असंवैधानिक और शिक्षा विरोधी बताया। याचिका में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षकों का मुख्य दायित्व छात्रों को पढ़ाना है। उन्हें लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही चुनाव ड्यूटी, सर्वे और अन्य सरकारी कार्यों का बोझ है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। अब जनगणना जैसे बड़े कार्य में लगाए जाने से स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
काउंसिल ऑफ भारतीय स्कूल एजुकेशन ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को तुरंत ऐसे कार्यों से मुक्त किया जाए और इसके लिए अलग स्टाफ की नियुक्ति की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी, जिसमें जिला प्रशासन, हरियाणा के मुख्य सचिव और जिला शिक्षा अधिकारी को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।





