Non smokers Also Becoming Victims Of Lung Cancer In Cyber City Air Pollution Becomes A Major Cause
साइबर सिटी में सिगरेट न पीने वाले भी बन रहे लंग कैंसर का शिकार
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nदीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
लंग कैंसर अब केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रह गया है। गुड़गांव में पिछले कुछ साल के दौरान ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया फिर भी वे फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित पाए गए। विश्व लंग कैंसर दिवस पर डॉक्टर्स ने चेताया है कि लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता, PM2.5, वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं, खुले में कूड़ा व प्लास्टिक जलाने से निकलने वाले जहरीले रसायन, सेकेंड हैंड स्मोक तथा कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण इस बदलाव के लिए जिम्मेदार हैं। पारस हेल्थ में फेफड़ों के कैंसर के 1,338 मरीजों के उपचार के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में मरीज नॉन-स्मोकर थे। इनमें 59.2 प्रतिशत मरीज नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) से पीड़ित थे। सीनियर कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. रजित रतन ने बताया कि पहले की तुलना में नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के मामले बढ़े हैं। कहा कि बढ़ता वायु प्रदूषण, PM2.5 और औद्योगिक व वाहन उत्सर्जन ऐसे लोगों में भी कैंसर का खतरा बढ़ा रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। मणिपाल हॉस्पिटल गुड़गांव के कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर एंड ऑन्को रोबोटिक सर्जरी नॉर्थ वेस्ट क्लस्टर के वाइस चेयरमैन डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा ने बताया कि अस्पताल में आने वाले लंग कैंसर के लगभग 40 से 45 प्रतिशत मरीज नॉन-स्मोकर हैं।मां की गर्भ में ही पड़ रहा असर : लंग कैंसर विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता डॉ. सत्या सहाय ने बताया कि गुड़गांव जैसे शहरों में लगातार खराब होती हवा फेफड़ों पर गंभीर असर डाल रही है। पांच साल के शोध में पाया कि गर्भावस्था के दौरान तंबाकू के धुएं या अत्यधिक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाली महिलाओं के बच्चों में भविष्य में फेफड़ों की गंभीर बीमारियों और लंग कैंसर का खतरा बढ़ा पाया गया।