31 जुलाई का संपादकीय ‘खतरा बढ़ा’ पढ़ा। अमेरिका-ईरान संघर्ष पश्चिम एशिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। दोनों देशों में ऐसे प्रभावशाली समूह भी हैं जो तनाव कम होने के बजाय टकराव बनाए रखने के पक्षधर दिखते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयान भी अक्सर बदलते रहे हैं। कभी वे बातचीत और शांति की बात करते हैं, तो कभी कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हैं। दूसरी ओर, ईरान की प्रतिक्रियाएं भी कई बार तनाव को और बढ़ा देती हैं। ऐसे माहौल में दोनों पक्षों की छोटी-सी कार्रवाई भी संघर्ष को भड़का सकती है। इसलिए युद्ध को आगे बढ़ने से रोकने के लिए दोनों देशों को संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना होगा। किसी भी पक्ष के लिए निर्णायक जीत हासिल करना आसान नहीं है, जबकि नुकसान लोगों को ही उठाना पड़ता है।