‘ना था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता...’

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n NBT न्यूज, लखनऊ : अलीगंज स्थित कलास्रोत आर्ट गैलरी में डॉ. सुधांशु मणि की पुस्तक ' फन विद अंकल शेक्सपियर ऐंड चाचा गालिब ' का विमोचन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत नाट्य प्रस्तुति से हुई, जिसमें डॉ. सुधांशु मणि स्वयं मिर्ज़ा गालिब और कार्लाइल मैक्फारलैंड शेक्सपियर के रूप में मंच पर आए।

नाटक में शेक्सपियर जब गालिब को 'गूगल' कहकर बुलाते हैं, तो गालिब तंज करते हैं कि तुमने 200 साल राज किया पर नाम तक याद नहीं। इस पर शेक्सपियर ने कहा कि 'नाम में क्या रखा है' तो गालिब कहते हैं कि हमारे यहां नाम में वोटर लिस्ट, मजहब और आधार कार्ड सब देखा जाता है। फर्जी शेरो-शायरी पर गालिब ने कहा कि वॉट्सऐप पर कोई भी घटिया शेर लिखकर नीचे गालिब का नाम लगा देते हैं। जो शेर पहली बार में समझ आ जाए वो गालिब का नहीं हो सकता। जब शेक्सपियर अपनी फिलॉसफी सामने रखते हुए कहते हैं कि पूरा संसार एक मंच है, तो गालिब अपना मशहूर शेर 'ना था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता...' सुनाकर समां बांध देते हैं। पुस्तक में दोनों कालजयी साहित्यकार आज के दौर में चुनाव, सोशल मीडिया और आधुनिक संवेदनशीलता पर चर्चा करते हैं। चर्चा में अजय जैन ने कहा कि यह कार्यक्रम दो महान प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने का जश्न है। लेखक डॉ. मणि ने बताया कि जर्मनी में शेक्सपियर को 'अंकल' और भारत में गालिब को 'चाचा' कहा जाता है, इसी से नाम रखा। युवाओं तक पहुंच के लिए इसे कॉमिक रूप दिया गया है। कार्यक्रम में प्रो. कुमकुम धर, प्रो. निशी पांडे, डॉ. हिमांशु बाजपेयी, अनुराग और मानसी डिडवानियां मौजूद रहे।