'मस्जिद बचानी है... जैसे बयानों से बिगाड़ा माहौल'

Contributed byAnkur.Tiwari|नवभारतटाइम्स.कॉम
we have to save the mosque statements incited violence in sambhal reveals judicial commission report
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार संभल की शाही जामा मस्जिद में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा अचानक नहीं भड़की, बल्कि कई दिनों तक माहौल बनाकर उसे दिशा दी गई। सर्वे को कानूनी प्रक्रिया के बजाय मस्जिद के अस्तित्व पर खतरे के रूप में पेश किया गया। लोगों में यह धारणा फैलाई गई कि अयोध्या के बाद अब संभल की मस्जिद बचानी है।

सांसद जिया-उर-रहमान बर्क सहित प्रभावशाली लोगों के बयानों और सार्वजनिक मंचों, मीडिया तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों ने धार्मिक भावनाएं भड़काईं। ‘मस्जिद थी, है और रहेगी’, ‘सर्वे नहीं होने देंगे’ जैसे कथनों ने टकराव की मानसिकता बनाई। रिपोर्ट में कहा गया कि वॉट्सऐप ग्रुपों, सोशल मीडिया नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों से लोगों को मस्जिद पहुंचने तथा सर्वे का विरोध करने के लिए संगठित रूप से बुलाया गया, इसलिए भीड़ स्वतःस्फूर्त नहीं थी। अफवाहों ने तनाव बढ़ाया, वुजूखाने का पानी निकालने को खुदाई बताकर भय और गुस्सा फैलाया गया। सर्वे शुरू होते ही बड़ी भीड़ जमा हुई, भड़काऊ नारे लगे और फिर पथराव, आगजनी तथा फायरिंग हुई। आयोग ने शारिक साठा गिरोह और बाहरी अपराधियों की संभावित भूमिका, अवैध हथियारों की मौजूदगी तथा घटनास्थल से Pakistan Ordnance Factory मार्किंग वाले 9 एमएम कारतूस की बरामदगी को गंभीर माना, हालांकि विदेशी साजिश पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया।