Nbfc Gold Loans Surge 69 In June Foreign Exchange Reserves Cross 10 Billion
जून में NBFC के गोल्ड जूलरी लोन में 69% की बढ़ोतरी: RBI
नवभारत टाइम्स•
(फोटो- नवभारत टाइम्स)
NBT रिपोर्ट, मुंबई
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक, जून 2026 के आखिर में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के गोल्ड जूलरी पर दिए गए लोन की कुल रकम 3.42 लाख करोड़ रुपये थी। यह एक साल पहले के 2.02 लाख करोड़ रुपये से 69.3 प्रतिशत ज़्यादा है, जो सभी बड़े लेंडिंग सेगमेंट में सबसे तेज बढ़ोतरी है। जून 2024 में यह आंकड़ा 1.44 लाख करोड़ रुपये था। NBFCs की कुल लेंडिंग में रिटेल क्रेडिट मुख्य वजह रही। जून 2026 में इसमें सालाना आधार पर 20.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि एक साल पहले यह 14.3 प्रतिशत थी। इस सेगमेंट में हाउसिंग लोन, व्हीकल लोन और गोल्ड ज्वेलरी पर लोन में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई, जिससे कंज्यूमर लेंडिंग में तेजी बनी रही। जून 2026 में खेती और उससे जुड़े कामों के लिए क्रेडिट में तेज़ी आई। इसमें सालाना आधार पर 17.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 5.1 प्रतिशत थी। हालांकि, जून 2026 में इंडस्ट्रियल सेक्टर को दिए जाने वाले क्रेडिट की ग्रोथ धीमी होकर 6.7 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 10.3 प्रतिशत थी। इसकी मुख्य वजह इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को कम लोन मिलना था, जिसका इंडस्ट्रियल क्रेडिट में सबसे बड़ा हिस्सा है। NBFCs की ओर से सर्विस सेक्टर को दिए जाने वाले लोन में भी कमी आई। जून 2025 में यह 22.4 प्रतिशत थी, जो घटकर 17.6 प्रतिशत रह गई। इसकी वजह यह थी कि कमर्शियल रियल एस्टेट में ज़बरदस्त ग्रोथ के बावजूद ट्रेड और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स को क्रेडिट कम मिला।
FCNR(B) का असर: विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा
RBI ने शुक्रवार को बताया कि 31 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले वाले हफ़्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 6.118 अरब डॉलर बढ़कर 682.354 अरब डॉलर हो गया था। पिछले महीने सेंट्रल बैंक और सरकार ने देश में ज्यादा विदेशी मुद्रा लाने के लिए कई उपाय शुरू किए थे, जिनमें FCNR(B) उपाय भी शामिल था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन स्कीमों के तहत देश को अब तक 32 अरब अमेरिकी डॉलर मिले हैं। इस साल 27 फरवरी को खत्म हुए हफ्ते में रिजर्व बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने और रुपये पर दबाव बढ़ने के कारण कई हफ्तों तक इनमें गिरावट आई, और RBI को डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में दखल देना पड़ा।