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Gen Z ने बदला राजनीतिक दलों का अजेंडा
नवभारतटाइम्स.कॉम•
भूपेंद्र शर्मा
उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले और नौकरी के लिए होने वाली परीक्षाओं में पेपर लीक व गड़बड़ी की समस्या दशकों पुरानी है। लेकिन, पिछले दो वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं और इसके खिलाफ छात्रों का आक्रोश भी बढ़ा है। युवा शक्ति के हालिया दो बड़े प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा और रोजगार अब राजनीति के प्रमुख मुद्दे बन रहे हैं। युवा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। सरकारों और राजनीतिक दलों को अपनी प्राथमिकताओं में शिक्षा-रोजगार को शामिल करने के लिए वे मजबूर कर रहे हैं। आने वाले चुनावों में ये दोनों मुद्दे पार्टियों के घोषणा पत्र में नजर आएंगे। हर दल को अपनी रणनीति युवाओं को केंद्र में रखकर बनानी होगी।गड़बड़ियों ने तोड़ा भरोसा
NEET UG पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स का असंतोष अचानक नहीं उमड़ा, इसकी शुरुआत मई 2024 में ही हो गई थी। तब भी NEET में गड़बड़ी को लेकर खूब शोर हुआ। हालांकि उस समय पेपर रद्द नहीं किया गया था। उसी वर्ष UGC नेट की परीक्षा कैंसल की गई थी। साथ ही, कुछ और एग्जाम भी स्थगित करने पड़े थे। इसके बाद भी बीच-बीच में कई परीक्षाओं को लेकर सवाल उठते रहे। लेकिन, छात्रों का भरोसा उस समय दम तोड़ गया, जब इस साल पेपर लीक के कारण NEET को रद्द करना पड़ा। जंतर-मंतर पर देश के हर हिस्से के छात्र जुटे और आखिरकार शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। अब झारखंड में नौकरी के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन चल रहा है।
सोशल मीडिया और AI के दौर में पले-बढ़े Gen Z पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था चाहते हैं। ऐसा सिस्टम, जिसमें मेहनत करने वालों के साथ ठगी न हो। पढ़ाई के बाद जब वे नौकरी के लिए परीक्षा दें, तो वहां भी निष्पक्षता बनी रहे और दिखे भी। मौजूदा माहौल में यह बेहद जरूरी है कि बड़ी परीक्षाएं कराने वाली एजेंसियों पर छात्रों का कम होता भरोसा फिर से बहाल हो।
नॉर्मलाइजेशन पर भी हो बात
अब समय सवालों से भागने का नहीं, उनके हल तलाशने का है। नए सत्र की परीक्षाओं में नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में भी स्पष्टता लानी होगी, क्योंकि छात्र इसे लेकर भी परेशान रहते हैं। 2027-28 का सेशन बहुत ही महत्वपूर्ण रहने वाला है। यह सत्र ही छात्रों की विश्वास बहाली का रास्ता तय करेगा।
छात्र आंदोलनों ने देश-दुनिया में हमेशा से ही राजनीति और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश की युवा शक्ति ने इस बार भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की। उसने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपने भविष्य के बारे में बेहद गंभीरता से सोचती है। जिस तरह से मेडिकल से लेकर लोक सेवा आयोग की परीक्षा देने वाले छात्र सड़कों पर आए हैं, उसे देखते हुए तो ऐसा ही लग रहा है।
छात्र आंदोलन के बीच अभद्र भाषा को लेकर विवाद भी देखने को मिला। शैक्षणिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने कहा है कि छात्रों की मांगें बिल्कुल जायज हैं और पेपर लीक जैसी समस्या का स्थायी समाधान होना ही चाहिए, लेकिन विरोध की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप हो।