Vande Mataram Legal Protection Respect Or Controversy
विविधता का सम्मान
नवभारतटाइम्स.कॉम•
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद वंदे मातरम् को अब राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा मिल गई है। इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसे रोकना दंडनीय अपराध होगा। देश के स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण स्मृतियों में से एक यह गीत भी है। आजादी की लड़ाई में इसने करोड़ों लोगों को प्रेरित किया। लेकिन, इसकी अनिवार्यता और कानूनी सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस भी चल रही है।
सवाल भी जरूरी । कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने व्यवहारिकता के साथ-साथ यह सवाल भी उठाया है कि क्या सम्मान और धैर्य को कानून के जरिये पैदा किया जा सकता है। वहीं, डीएमके सांसद कनिमोझी का आरोप है कि राष्ट्रवाद की आड़ में एक खास राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये सवाल और आरोप इस बहस का दूसरा पहलू दिखाते हैं और ये भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।बंगाल और केरल में विवाद । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस साल जनवरी में वंदे मातरम् गाने के लिए प्रोटोकॉल का पहला सेट जारी किया था। इसके मुताबिक, गीत के सभी 6 पैरा गाए जाएंगे। विवाद तब से ही गहराया हुआ है। पश्चिम बंगाल के मदरसों में वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने का मामला अदालत पहुंच गया। वहीं, केरल में चीफ सेक्रेटरी के हालिया सर्कुलर से सियासी घमासान मचा हुआ है। इसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रगीत को पूरा गाने का निर्देश था, जिस पर विपक्ष ने राज्य की कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार को घेर लिया है।
टकराव रोका जाए । आगे इस तरह का मामला दूसरे राज्यों से भी उठ सकता है। हालांकि इसे वंदे मातरम् के प्रति असम्मान के रूप में नहीं देखना चाहिए। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता है। वहां किसी फैसले को लेकर असहमति हो सकती है, और उसे भी बराबर जगह मिलनी चाहिए। यह भी ध्यान में रखना होगा कि देश में क्षेत्रीय पहचान और अस्मिता बहुत मजबूत है। तमिलनाडु में राज्य गान 'तमिल थाई वाझ्थु' से जुड़ा आदेश यही दिखाता है, पर इसकी वजह से टकराव नहीं बढ़ना चाहिए।
गलत उपयोग न हो । कानून या दंड से डर पैदा किया जा सकता है, सम्मान नहीं। सरकारों को सुनिश्चित करना होगा कि नए कानून का इस्तेमाल केवल जानबूझकर किए गए अपमान के मामलों में ही हो। शांतिपूर्ण असहमति या राजनीतिक-वैचारिक विरोध भी लोकतंत्र के लिए जरूरी है और इस पर पहरा नहीं होना चाहिए। इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पहली बार लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम् गाया जाएगा। इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन में देश को जोड़ा था, अब इसे विवाद की वजह बनाना सही नहीं।