नई दिल्ली : रतन टाटा 2012 में टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस से रिटायर हुए। तब माना गया कि नोएल टाटा उनकी जगह लेंगे। मगर रतन टाटा की जगह ली शापूरजी पालोनजी ग्रुप के साइरस मिस्त्री ने। शापूरजी परिवार की टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। फिलहाल, शापूरजी परिवार का अभी टाटा संस की लिस्टिंग की मांग को लेकर टाटा ग्रुप के साथ विवाद भी चल रहा है।
दो मौके निकले खैर, नोएल का नाम 2016 में फिर उछला, जब साइरस को रतन टाटा के साथ अनबन की वजह से पद छोड़ना पड़ा। इस बार भी उन्हें टाटा संस का शीर्ष पद नहीं मिला। यह गया तब टीसीएस से स्टार मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ एन चंद्रशेखरन के पास। नोएल अब टाटा ग्रुप पर अंतिम रूप से नियंत्रण रखने वाले टाटा के ट्रस्टों के चेयरमैन हैं। रतन टाटा के 2024 में निधन के बाद उन्हें यह पद मिला था।
ट्रेंट में दिखाई दम
नोएल लो-प्रोफाइल लीडर रहे हैं। उन्होंने टाटा ग्रुप में पहले ट्रेंट की कमान संभाली। इसके बाद ग्रुप की वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के बोर्ड में उन्हें जगह मिली। वह सधी और सतत ग्रोथ में यकीन करते हैं। उन्होंने ट्रेंट में वेस्टसाइड और जुडियो जैसे ब्रैंड्स स्थापित किए। टाटा ग्रुप के ट्रस्टों के मुखिया बनने के बाद से वह अपने कॉरपोरेट करियर की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं।
मेहली ने दी चुनौती
इससे पहले नोएल को टाटा के ट्रस्टों का चेयरमैन बनने पर रतन टाटा के करीबी मेहली मिस्त्री से चुनौती मिली थी। वह इन ट्रस्टों में काफी ताकतवर माने जाते थे, जिन्हें एक समय पर रतन टाटा के उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जा रहा था। मगर यह पद आखिरकार नोएल को मिला और इसके साथ ही उनका रसूख भी। नोएल की वजह से ही इसके बाद मेहली मिस्त्री के टाटा ग्रुप के ट्रस्टों में पुनर्नियुक्ति को मंजूरी नहीं मिल पाई, जिस पर दोनों खेमों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए गए। मेहली के जाने के बाद नोएल बिना शक ग्रुप के सबसे ताकतवर लीडर बन गए। फिर उन्होंने टाटा ग्रुप की अनलिस्टेड कंपनियों के घाटे को लेकर चंद्रशेखरन पर सवाल उठाए, जिसकी वजह से उन्हें पद छोड़ना पड़ा। चंद्रशेखरन के इस्तीफे को गुरुवार को मंजूर भी कर लिया गया।
अगली परीक्षा
अब उनकी अगली परीक्षा टाटा संस का नया चेयरमैन चुनने की है। इसके लिए कुछ नामों को लेकर अटकलें भी लग रही हैं। इन अटकलों में फिलहाल टाटा स्टील के ग्लोबल सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर टी वी नरेंद्रन को सबसे आगे बताया जा रहा है। मगर चुनौती सिर्फ टाटा संस का नया चेयरमैन चुनने की ही नहीं होगी। यह भी देखना होगा कि वह नोएल के पैमानों पर खरा उतर पाते हैं या नहीं।