जब कब्र पर जाकर फूट-फूटकर रोए जिन्ना

नवभारतटाइम्स.कॉम
when jinnah cried bitterly at the grave deep love for ratti wife 24 years younger
79 साल पहले अगस्त के पहले हफ्ते का कोई दिन। दक्षिण मुंबई के मझगांव स्थित एक कब्रिस्तान में 70 साल का एक बुजुर्ग अपनी 18 साल पहले दफ्न की गई पत्नी की कब्र के आगे फूट-फूटकर रो रहा था। वह आखिरी बार उस औरत की कब्र को देख रहा था, जिससे उसने अथाह प्यार किया था। उम्र में 24 साल का फासला होने के बावजूद शादी की। हालांकि फिर यही शादी एक तनावपूर्ण रिश्ते में बदल गई। यह कहानी है पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की। जिन्ना भले ही अपना सब कुछ पाकिस्तान ले गए हों, लेकिन मोहब्बत की आखिरी निशानी को कभी भारत से जुदा नहीं कर पाए। आज भी जिन्ना की पत्नी रतनबाई उर्फ रत्ती की कब्र पर अंकित है कि ‘वह जिस तारीख (20 फरवरी) को जन्मी और उसी तारीख को दुनिया से गई।’

अदालत का आदेश नहीं आया काम। अपनी किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में लैरी कॉलिन्स और डोमिनिक लैपियर लिखते हैं कि 41 की उम्र में अपने बहुत अजीज पारसी दोस्त की 17 साल की बेटी रत्ती के इश्क में जिन्ना मानो पागल हो गए थे। उससे पहले लगता था कि जिन्ना उम्र भर अकेले ही रहेंगे। जिन्ना और रत्ती छुट्टियां मनाने दार्जलिंग गए थे, वहीं उनका इश्क परवान चढ़ा। मानो रत्ती पर जिन्ना ने जादू कर दिया हो। रत्ती के पिता इस रिश्ते के इस हद तक खिलाफ थे कि उन्होंने अदालत से आदेश जारी करा दिया कि जिन्ना उनकी बेटी से न मिलें। लेकिन उनकी यह कोशिश बेकार गई और 18 की उम्र होते ही रत्ती ने जिन्ना से शादी कर ली।
हाजिरजवाब थीं रत्ती । 1921 का एक किस्सा बहुत मशहूर है, जिससे रत्ती की हाजिरजवाबी का पता चलता है। नई दिल्ली में एक दोपहर रत्ती खाने की टेबल पर वायसराय लॉर्ड रीडिंग की बगल में बैठी थीं। रीडिंग इस बात का दुखड़ा रो रहे थे कि प्रथम विश्वयुद्ध के बाद ऐसा माहौल बन गया है कि जर्मनी जाना बहुत कठिन हो गया है। रत्ती ने इस कठिनाई के बारे में जानकारी चाही। रीडिंग ने कहा, ‘दरअसल जर्मन लोग हम अंग्रेजों को पसंद नहीं करते हैं, इसलिए वहां नहीं जा सकते।’ तब रत्ती तपाक से बोलीं, ‘फिर आप लोग हिंदुस्तान कैसे आए?’

सुनहरा सपना चकनाचूर । बगावत से उपजी रत्ती-जिन्ना की शादी ने 10 साल बाद ही दम तोड़ दिया। दोनों की उम्र में अंतर था, स्वभाव भी अलग था, इस वजह से रिश्तों में तनाव पैदा हुआ। रत्ती की तड़क-भड़क के कारण जिन्ना कई बार मुश्किल में फंस जाते थे। जिन्ना और रत्ती की वैचारिक भिन्नता उनके प्यार पर हावी होती चली गई। आखिर 1928 में रत्ती जिन्ना को छोड़कर चली गईं। सालभर बाद जरूरत से ज्यादा पेनकिलर खाने से रत्ती की मौत हो गई। अगस्त का महीना आता है, तो मुंबईकरों को रत्ती की यह दुखांत प्रेम कहानी अनायास ही स्मरण हो आती है।