Fcra Amendment Bill Demand For Balance Sent To Jpc
संतुलन बनाया जाए
नवभारतटाइम्स.कॉम•
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA को लोकसभा ने संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया है। 31 सदस्यीय JPC इस साल शीत सत्र के पहले हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच के टकराव को दूर करने का यह एक तरीका हो सकता है। वैसे भी FCRA के असर को देखते हुए इस पर व्यापक बहस की जरूरत है।
तमाम संस्थाएं बंद । विदेशी चंदे का मसला देश में पांच दशक पुराना है। 1976 में पहली बार विदेशी चंदे और सहायता की निगरानी के लिए कानून लाया गया था। 2010 में फिर पुराने कानून को FCRA से रिप्लेस किया गया। इसके बाद भी समय-समय पर कई संशोधन हुए और कानून कठोर से कठोरतम होता गया। 2012 से अभी तक 52 हजार से ज्यादा NGOs और संस्थाओं को FCRA लाइसेंस मिला है। लेकिन, इनमें से फिलहाल केवल 14,455 के लाइसेंस सक्रिय हैं। बाकियों के लाइसेंस रद्द हो गए या रिन्यू नहीं कराए गए।दोनों पक्ष । साल 2020 में हुए संशोधन बेहद सख्त माने जाते हैं। और मौजूदा बिल उसी के आगे की कड़ी है। इसके उस प्रावधान को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही, जिसके मुताबिक लाइसेंस समाप्त होने पर संस्थाओं को मिला विदेशी चंदा और उससे बनाई गई संपत्तियां Designated Authority के अधीन चली जाएंगी। सरकार का कहना है कि विदेशी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि इसे अल्पसंख्यकों और सिविल सोसायटी को परेशान करने के लिए लाया गया है।
सुरक्षा से जुड़ा । FCRA को लेकर इन दोनों ही पक्षों को समझने की जरूरत है। किसी भी देश में बाहर से आने वाले चंदे या मदद का हिसाब-किताब जरूरी है। यह मामला आर्थिक पारदर्शिता ही नहीं, सुरक्षा और संप्रभुता से भी जुड़ा है। लेकिन, इसकी वजह से उन संस्थाओं के लिए बेवजह की परेशानी नहीं खड़ी होनी चाहिए, जो वाकई में सामाजिक कार्यों से जुड़ी हैं। देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, महिला जागरूकता जैसे क्षेत्रों में हजारों NGO काम कर रहे हैं। इनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चर्चा का मौका । JPC में जाने से इस बिल को विस्तार से जांचने का मौका मिलेगा। विपक्ष अपनी आपत्तियों और सुझावों को वहां रख सकता है। विशेषज्ञों और दूसरे पक्षों की राय भी जानी जा सकती है। उम्मीद है कि इससे सहमति बनाने में मदद मिलेगी। FCRA जैसे कानून हमेशा संतुलन की मांग करते हैं और यहां भी उसका ध्यान रखा जाना चाहिए।