लक्ष्मी योजना पर सरकार की ओर से सफाई नहीं मिलने पर HC नाराज़

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hc strict on lakshmi yojana directs to provide benefits without mpmla approval seeks response from government
nNBT रिपोर्ट, नई दिल्ली

लक्ष्मी योजना के तहत लाभ लेने के लिए सांसद या विधायक की मंजूरी अनिवार्य किए जाने पर उठे सवाल का जवाब दिल्ली सरकार ने तय समय के भीतर नहीं दिया। इस पर हाई कोर्ट ने सोमवार को नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सरकार से कहा कि एक भी लाभार्थी को सांसद या विधायक की पसंद या नापसंद के भरोसे छोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। राज्य सरकार के अनुरोध पर हाई कोर्ट ने जवाब के लिए 10 दिनों का वक्त दिया और तार्किक जवाब के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामला कांग्रेस के पूर्व पार्षद अभिषेक दत्त और वेदपाल ने उठाया है। आरोप है कि लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन करते समय जनप्रतिनिधियों की मंजूरी मांगी जा रही है, जबकि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में ऐसी बाध्यता का उल्लेख नहीं है। जनहित याचिका पर 19 अगस्त को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब आधिकारिक नोटिफिकेशन में ऐसी शर्त नहीं है, तो आवेदकों से MP या MLA की सिफारिश क्यों मांगी जा रही है। कोर्ट ने इस पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था। कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह आया कि क्या प्रशासन किसी योजना के आधिकारिक तौर पर अधिसूचित नियमों से अलग कोई अतिरिक्त शर्त लागू कर सकता है।

कोर्ट की नाराज़गी इस बात को लेकर रही कि सरकारी अधिकारियों की ओर से ऐसी अतिरिक्त शर्त क्यों लगाई जा रही हैं, जिसका आधार आधिकारिक नोटिफिकेशन में दिखाई नहीं देता। याचिका में इसे मनमानी और लाभार्थियों के लिए गैरजरूरी बाधा बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी कल्याणकारी योजना का लाभ पाने के लिए लोगों को राजनीतिक सिफारिश पर निर्भर नहीं बनाया जा सकता।

कोर्ट ने साफ किया है कि सरकारी योजनाओं का संचालन उन नियमों के अनुरूप होना चाहिए, जिन्हें विधिवत अधिसूचित किया गया है। निर्वाचित प्रतिनिधियों की मंजूरी जैसी अतिरिक्त शर्त का आधार स्पष्ट करना सरकार की जिम्मेदारी है।