प्लेस्टेशन या प्लेग्राउंड

नवभारतटाइम्स.कॉम
childrens mobile addiction return from playstation to playground
8-9 साल के एक लड़के से उसकी मां मोबाइल लेने की कोशिश करती है तो वह लात घूंसों की बरसात कर देता है। बीचबचाव करने बड़ा भाई आता है तो उसके साथ भी भिड़ जाता है। यह विडियो पिछले दिनों वायरल हुआ। मोबाइल लेने मात्र पर इतना गुस्सा, वह भी इतनी कम उम्र में। इस तरह की खबरें पिछले कई साल से सुर्खियां बन रही हैं कि मोबाइल फोन न मिलने पर बच्चे आक्रामक हो रहे हैं या घातक कदम तक उठा रहे। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला, उत्तर प्रदेश के मऊ से लेकर कर्नाटक के हुबली तक 13 और 14 साल के किशोरों ने सिर्फ इसलिए जान दे दी कि हर समय गेम खेलने के कारण उनसे स्मार्टफोन वापस ले लिया गया। बीती फरवरी गाजियाबाद में भी इसी वजह से 12 से 16 साल की तीन बहनों ने घर की नवीं मंज़िल से कूद कर जान दे दी थी। टास्क बेस्ड गेम्स की लत के कारण पिता ने उनसे फोन ले लिया था। टास्क वाले ब्लू व्हेल जैसे खतरनाक खेल की वजह से कितने मासूम बच्चे जान गंवा चुके हैं। हाल में आई एक वेब सीरीज़ में यही दिखाया है कि टास्क जीतने के लिए बच्चा कई दिनों का खाना लेकर घर की छत पर बनी टंकी में छुप जाता है।

बच्चों को इस हद तक पहुंचाने का ज़िम्मेदार आखिर कौन है। सबसे बड़े ज़िम्मेदार तो माता-पिता ही हैं। खाना न खाए तो, रोए तो, एक जगह न बैठ रहा हो तो झट से मोबाइल पकड़ा दो। आप खुद ही तो उसे मोबाइल एडिक्ट बना रहे हैं। रही सही कसर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पूरी कर देते हैं। जो पसंद है, वही लगातार परोसा जाता है। ऐप्स में ऐसे फीचर्स रखे जाते हैं जो स्क्रीन की लत लगा देते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित हो ही रही, नींद पूरी न होने से वे चिड़चिड़े भी हो रहे हैं। वक्त आ गया है कि देश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्किंग ऐप्स पर पाबंदी लगा दी जाए। ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, तुर्किये, फ्रांस, पुर्तगाल, यूएई ऐसा पहले ही कर चुके हैं। स्पेन, ग्रीस, यूके और कनाडा भी इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
बच्चों की मेंटल हेल्थ पर पड़ रहे नकारात्मक असर की शिकायत के बाद अब मेटा भी बड़े बदलाव करने को तैयार है। टीनेजर्स इंस्टा या फेसबुक रोज़ सिर्फ दो घंटे ही यूज़ कर पाएंगे। स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन बंद रहेंगे। 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स के लिए रात 12 से सुबह 6 बजे तक एक्सेस बंद हो जाएगा। स्क्रीन टाइम घटेगा तो फिज़िकल एक्टिविटी बढ़ेगी। प्लेस्टेशन से ज्यादा ज़रूरी प्लेग्राउंड। पीएम का यह संदेश बच्चों से अधिक अभिभावकों के लिए है।