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नवभारतटाइम्स.कॉम
new plan by forest department to protect plants fencing in compact areas rcc tree guards in green belts
- कॉम्पैक्ट जगहों पर होगी फेंसिंग , ग्रीन बेल्ट और ओपन स्पेस में लगाए जाएंगे RCC ट्री गार्ड

दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव
शहर में पौधे लगाने के बाद अब उन्हें बचाने पर भी उतना ही जोर दिया जा रहा है। शुरुआती वर्षों में पौधों को वाहनों की टक्कर, आवारा पशुओं और मानवीय गतिविधियों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वन विभाग ने इस बार जगह के हिसाब से अलग-अलग सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की योजना बनाई है। कॉम्पैक्ट एरिया में एक साथ लगाए गए पौधों को फेंसिंग के जरिये सुरक्षित किया जाएगा, जबकि ग्रीन बेल्ट, सड़क किनारे और ओपन स्पेस में लगाए जाने वाले पौधों के चारों ओर मजबूत RCC ट्री गार्ड लगाए जाएंगे।

पौधरोपण के बाद पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलने से कई पौधे शुरुआती वर्षों में ही खराब हो जाते हैं। ऐसे में नई व्यवस्था का फोकस पौधे लगाने के साथ-साथ उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित रखने और सर्वाइवल रेट बढ़ाने पर होगा। वन विभाग की योजना के अनुसार, जहां जगह सीमित है और एक साथ बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, वहां अलग-अलग पौधों के बजाय पूरे हिस्से की फेंसिंग की जाएगी। इससे पौधों को एक साथ सुरक्षा मिल सकेगी, वहीं ग्रीन बेल्ट, सड़क किनारे और खुले स्थानों पर जहां पौधे एक-दूसरे से दूरी पर लगाए जाते हैं, वहां पौधों के चारों ओर चार पैनल वाले RCC ट्री गार्ड लगाए जाएंगे। मजबूत RCC गार्ड का उद्देश्य पौधों को सड़क से गुजरने वाले वाहनों की टक्कर, आवारा पशुओं के नुकसान और लोगों की आवाजाही से बचाना है। खासकर पौधों के शुरुआती वर्षों में तना और जड़ मजबूत होने तक सुरक्षा बेहद जरूरी मानी जाती है। विभाग का मानना है कि इस दौरान पौधे सुरक्षित रहे तो उनके विकसित होकर पेड़ बनने की संभावना भी बढ़ेगी।

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जगह देखकर तय होगी सुरक्षा व्यवस्था:

डीएफओ गुड़गांव सुरेंद्र दांगी के अनुसार, हर स्थान पर एक जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने के बजाय वहां की परिस्थितियों के अनुसार व्यवस्था की जाएगी। कॉम्पैक्ट जगहों के लिए फेंसिंग और खुले क्षेत्रों में अलग-अलग पौधों के लिए RCC ट्री गार्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पौधों की देखभाल के साथ उनकी सुरक्षा भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।

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पौधरोपण के बाद अब संरक्षण पर फोकस

जानकारी के अनुसार, अब तक पौधरोपण के दौरान मुख्य जोर पौधे लगाने की संख्या पर रहता था, लेकिन नई योजना में पौधों के सर्वाइवल को भी अहम मानक बनाया जा रहा है। शुरुआती वर्षों में सुरक्षा मिलने से पौधों के सुरक्षित रूप से विकसित होने की उम्मीद ज्यादा रहेगी। विभाग का कहना है कि ज्यादा पौधे सुरक्षित रहेंगे तो आने वाले वर्षों में शहर के ग्रीन कवर को बढ़ाने में भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।