क्या FD और डेट फंड से बेहतर है SIF में निवेश?

नवभारत टाइम्स
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NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली: बाजार में स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) के आने से वेल्थ मैनेजर्स के निवेश कराने के तरीके में बदलाव आ रहा है। पहले सिर्फ डेट म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड इनकम स्कीमों का बोलबाला होता था। वेल्थ मैनेजर्स बड़े म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो वाले निवेशकों को अपना कुछ पैसा SIF में डालने की सलाह दे रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह टैक्स की बचत और निवेश की अलग रणनीतियां हैं।

फंड हाउसों ने हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट और इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट जैसी कई कैटिगरी में SIF लॉन्च किए हैं। 31 जुलाई तक SIF के पास कुल 23,177 करोड़ रुपये का फंड (AUM) इकट्ठा हो चुका है। इसमें करीब 95,000 निवेशक हैं और औसतन हर निवेशक ने 21 लाख रुपये लगाए हैं। कुल फंड में हाइब्रिड SIF की हिस्सेदारी 16,523 करोड़ रुपये है।
SIF360.com के फाउंडर संदीप सेठ ने ET को बताया कि SIF में लॉन्ग-शॉर्ट निवेश, डायनेमिक असेट एलोकेशन और हेजिंग जैसी तकनीकों से निवेश में लचीलापन मिलता है।

वेल्थ मैनेजर्स फिलहाल हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रैटेजी से शुरुआत कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि यह उन निवेशकों के लिए बहुत अच्छा है जो जोखिम कम लेना चाहते हैं, टैक्स बचाना चाहते हैं और एक से तीन साल की अवधि में बैंक FD या डेट फंड से थोड़ा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं। इक्विटी वाले SIF की सलाह देने से पहले मैनेजर्स कम से कम एक साल तक उनके प्रदर्शन और स्थिरता को देखना चाहते हैं।

कुछ हाइब्रिड SIF ऐसी रणनीतियों पर काम करते हैं जिनमें जोखिम वाली इक्विटी कम होती है। ये आर्बिट्राज, पेयर ट्रेड्स और कवर्ड कॉल्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। फिक्स्ड इनकम के साथ टैक्स में भी छूट चाहने वालों के लिए ये विकल्प हो सकता है।