हिंद-प्रशांत पर नज़र

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, समुद्री सुरक्षा , क्रिटिकल मिनरल्स समेत विभिन्न विषयों पर 20 समझौते हुए। भारतीय प्रधानमंत्री ने वहां की संसद को संबोधित किया और जर्काता की धरती से एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत की बात कही। पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब इस क्षेत्र में भू-राजनीति नई करवट ले रही है।

चीन को संदेश । मोदी ने कहा कि भारत हिंद-प्रशांत में नौवहन की स्वतंत्रता में विश्वास करता है। भारत ऐसा देश है, जो विकास के रास्ते पर चलता है, विस्तारवाद के नहीं। यह संदेश चीन के लिए है, जो दक्षिण चीन सागर और उसके बाहर अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है। वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और शांति के लिए हिंद-प्रशांत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दुनिया का लगभग 60% समुद्री व्यापार इससे होकर गुजरता है।
बदली रणनीति । भारत हमेशा से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नौवहन की आजादी का समर्थक रहा है। पीएम मोदी की मौजूदा यात्रा और हालिया दौरे व विदेशी नेताओं से मुलाकातें बताती हैं कि भारत इस क्षेत्र में बदली रणनीति पर काम कर रहा है। पिछले दिनों जापान की पीएम सनाए तकाइची जब नई दिल्ली आई थीं, तब भी दोनों देशों ने मुक्त हिंद-प्रशांत की बात की थी। मोदी का दूसरा पड़ाव ऑस्ट्रेलिया है और वहां भी इस मुद्दे को जगह मिलने की उम्मीद है।

साझा व्यवस्था । भारत और इस क्षेत्र के देशों के लिए जरूरी है कि वे मिलकर एक साझा व्यवस्था पर काम करें। QUAD का उदाहरण सामने है। अमेरिका ने इसका इस्तेमाल चीन के खिलाफ करने की कोशिश की। हालांकि अब ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। वॉशिंगटन और पेइचिंग, दोनों ही सुलह चाहते हैं। ऐसे में संभावना यही है कि हिंद-प्रशांत की चिंता पीछे छूट जाएगी। हालांकि इस क्षेत्र के देश पीछे नहीं हट सकते। जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ दूसरे देशों को भारत एक साझा उद्देश्य से एकजुट करने की कोशिश कर रहा है।

विकल्प की कोशिश । हिंद-प्रशांत केवल चीन की चिंताओं से ही नहीं जुड़ा, यह अवसरों का क्षेत्र है। ग्रीन एनर्जी, रेयर अर्थ मटीरियल, सेमीकंडक्टर और टेक्नॉलजी समेत तमाम क्षेत्रों में लंबे समय के लिए साझेदारी विकसित की जा सकती है। इनमें से कई सेक्टर ऐसे हैं, जिन पर या तो अमेरिका या चीन ने एकाधिकार कायम किया हुआ है। अगर भारत एक वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाने में सफल रहता है, तो अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही वह पूरी दुनिया में स्थिरता ला सकता है।