Sme Strengthens Manufacturing Giving New Flight To The Economy
SME बना सकते हैं मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत
नवभारतटाइम्स.कॉम•
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जब भारत पर 50% टैरिफ लगाया तो मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री हिल गई। पश्चिम एशिया संकट का भी असर पड़ा। स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, पर झटका लग चुका है। इसके अलावा, आईटी इंडस्ट्री में AI के आने से भी सर्विस सेक्टर के निर्यात पर प्रभाव पड़ सकता है। यह पहले से ही कहा जा रहा है कि इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन काफी खराब रहेगा।
उत्साहजनक आंकड़े । ऐसे में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। 2025 में इस क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 437.7 अरब डॉलर पहुंच गया। ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल्स जैसे हाई-वैल्यू उत्पादों का निर्यात बढ़ा है। नवंबर 2025 में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में 8% की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 7.80% रहा, जो दो वर्षों का उच्चतम स्तर था। मई 2026 में भी IIP 5.1% पर बना रहा, जो मजबूत घरेलू मांग और उत्पादन क्षमता में सुधार का संकेत देता है।निवेशकों की कमी । कोविड के बाद चीन से कई विदेशी प्लांट हटने और उनके भारत आने की उम्मीद थी, लेकिन इन कंपनियों ने वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड जैसे देशों को चुना। जापान की वित्तीय सेवा कंपनी और निवेश बैंक नोमुरा के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में चीन से 56 कंपनियां निकलीं, लेकिन उनमें से तीन ही भारत आईं। सबसे ज्यादा 26 कंपनियां वियतनाम, 11 ताइवान और 8 कंपनियां थाईलैंड गईं।
आयात-निर्यात में संतुलन । लेकिन चाइना प्लस वन की नीति का फायदा आने वाले वक्त में भी भारत को मिल सकता है। बहरहाल, भारत का निर्यात बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन साथ में आयात भी बढ़ा है। मई 2026 में आयात में भारी उछाल के कारण देश का व्यापार घाटा 28.21 अरब डॉलर के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वार्षिक आयात 670 से 720 अरब डॉलर के बीच रहता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और सोने-चांदी का है। इनका आयात टालना संभव नहीं, इसलिए विकल्प विकसित करने होंगे। कच्चे तेल के आयात को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े पैमाने पर अपनाना है। जिसके संकेत हालिया ऑटो सेल आंकड़ों से मिले भी हैं।
विकास में बाधा । निर्यात बढ़ाने के लिए केवल योजना निर्माण पर्याप्त नहीं। निर्यातकों की समस्याओं को सुना जाए, उनका समाधान किया जाए। नौकरशाही को तेज तर्रार बनाने की जरूरत है। भूमि अधिग्रहण कानून की जटिलता, लालफीताशाही, करप्शन, लॉजिस्टिक्स की अधिक लागत, SME की पूंजी तक पहुंच का अभाव जैसी बाधाएं हैं।
प्रोत्साहन की जरूरत । देश के कुल निर्यात में लगभग 45.7% योगदान देने वाले SME भारत के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग की रीढ़ हैं। यदि इन्हें पर्याप्त प्रोत्साहन दिया जाए तो निर्यात के साथ रोजगार और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी। IT इंडस्ट्री के सामने आए संकट का जवाब तो वे खुद देंगे, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर हम उसकी भरपाई कर सकते हैं और रोजगार भी बढ़ा सकते हैं।