Ram Mandir Donation Scam Vhp Admits Mistake Says Running System Solely On Trust Was Wrong
केवल भरोसे पर व्यवस्था चलाना ग़लती थी
नवभारतटाइम्स.कॉम•
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने माना है कि अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी से लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि इस मामले में किसी को बचाया नहीं जाएगा। पूनम पाण्डे ने उनसे इस मुद्दे पर बात की। पेश हैं प्रमुख अंश :
n क्या इस मामले से आर्थिक के साथ नैतिक और धार्मिक विश्वास का ज्यादा नुकसान हुआ?यह घटना दुखद है। इसका नुकसान हुआ है। लोगों की भावनाओं को चोट लगी है। जो आपने कहा, वह मैं स्वीकार करता हूं। मुझे विश्वास है कि जांच एजेंसियां ईमानदारी और मेहनत से उन सब दोषियों को ढूंढ लेंगी, जिन्होंने इस काम में जरा भी हाथ लगाया था। एक फास्ट ट्रैक कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमा चले, दोषी दंडित हों और जेल भेजे जाएं। अगर हिंदू समाज उन सबको जेल में जाता देख लेगा और अगर यह इसी साल हो पाया, तो विश्वास का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई होगी।
जांच अगर किसी बड़े पदाधिकारी तक पहुंचती है, तो क्या तब भी इसी स्पष्टता से मांग करेंगे?
निश्चित रूप से, क्योंकि अगर कोई बड़ा पकड़ा गया तो वह केवल कानून का ही नहीं, रामजी के समक्ष भी अपराधी है। उसे प्रायश्चित करना होगा और वह प्रायश्चित अपनी गलती का दंड भुगत कर करेगा। हम किसी को बचाएंगे नहीं।
n इसमें सिस्टम फेल हुआ है या कुछ लोगों ने सिस्टम का दुरुपयोग किया?
मैं मानता हूं कि सिस्टम का पालन ठीक से नहीं हो पाया। इतनी बड़ी व्यवस्था केवल विश्वास के आधार पर नहीं चलती, अनौपचारिक नहीं चलती। उसके लिए पूरा सिस्टम बनाना पड़ता है। जब ट्रस्टियों ने तय किया कि इसका प्रफेशनल मैनेजमेंट होना चाहिए, तब संतोष हुआ। उस प्रफेशनल मैनेजमेंट को एक सीईओ को देखना चाहिए। उसके लिए सर्च कमिटी भी बनाई। आगे से रामजी के धन की सुरक्षा और वहां की सारी व्यवस्था को सुधारने के लिए जो उपाय किए जाने चाहिए, SIT उनको तलाश रही है। ये दोनों कदम मिलेंगे, तो भविष्य में फिर गलती नहीं होगी। जिन्होंने गलत किया है, वे जेल जाएंगे। समाज फिर बाकी ट्रस्टियों को क्षमा करेगा।
n बदरीनाथ में भी चंदा चोरी के आरोप सामने आए हैं। क्या आपको लगता है कि बड़े मंदिरों में हर महीने का दान और खर्च का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि गड़बड़ी ना हो?
मैं मानता हूं कि मंदिरों का संचालन, उनकी आय और व्यय में पारदर्शिता होनी चाहिए। समाज को इसकी व्यवस्था के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
n इस पूरे विवाद से क्या सबक मिलता है?
इतनी बड़ी व्यवस्था केवल विश्वास के आधार पर चलाना ठीक नहीं रहा। एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिव प्रोसिजर होना चाहिए। अनुभवी लोगों, जरूरी इक्विपमेंट और गैजेट्स का इस्तेमाल किया जाए। अगर ऐसा नहीं किया तो धोखाधड़ी की आशंका बनी रहेगी।
n आपने आरोप लगा रहे विपक्ष से सबूत मांगे। वहीं, विपक्ष का कहना है कि यह असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
मैंने तो इतना ही कहा कि जिस किसी ने स्पेसिफिक आरोप लगाया है, वह कागज, गवाह, जानकारी SIT को सौंपे ताकि जांच में मदद मिल सके। जैसे प्रफेसर रामगोपाल यादव ने 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का आरोप लगाया। इन्होंने आरोप शायद हवा में नहीं लगाया होगा। कल ट्रस्ट ने जो आंकड़े जारी किए हैं तो कुल 10 हजार करोड़ भी नहीं आया, इन्होंने 20 हजार करोड़ का आरोप लगाया है। आरोप लगाकर भाग जाना, यह तो अच्छा नहीं है।