धन्य हुआ नाला

नवभारतटाइम्स.कॉम
drain exposed uncovering crores in corruption revealing administrative negligence
किसी नामी नदी की तरह तेज गति से बह रहा है नाला और अपने जीवन को धन्य महसूस कर रहा है। आखिर उसकी वजह से प्रशासन की पोल खुल रही है! करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आ रहा है!! अखबार लिख रहे हैं, चैनल चला रहे हैं, सोशल मीडिया पर वाहवाही हो रही है- नाले ने खोली पोल , करोड़ों रुपये का है झोल...। नाला विस्मित है। वह तो अपनी ही गति से बह रहा था। बारिश आई। खूब बरसी। बरसती ही रही। बरसात का साथ मिला, तो टनों कचरा बाहर निकल आया। वह कचरा, जिसके लिए कहा जा रहा था कि उसे बारिश से पहले ही साफ कर दिया गया है। इस मद में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं। सबूत के तौर पर फाइलें देखी जा सकती हैं। लेकिन नाला चीख-चीख कर कह रहा था कि अरे झुट्ठो, कुछ तो शर्म करो। देखो, मैं भीतर तक भरा पड़ा हूं। मेरी सांस घुट रही है। मेरा दम निकल रहा है। फिर भी तुम कह रहे हो कि मेरे भीतर की गाद निकाल दी गई है। मैं पूरी तरह साफ हो चुका हूं...।

जब लोग गंगा-जमुना की नहीं सुन रहे, तो भला नाले की कौन सुनता। नाला चीख-चीख कर अपनी दुर्गति के बारे में बताता रहा, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हर किसी ने अनसुनी की उसकी फरियाद। उसका गला घिस गया, तो वह थक-हार कर बैठ गया। हां, सदा की तरह साथ निभाया तो उसकी दोस्त बारिश ने। बारिश ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा- ओ नाले, फिकर नको। मैं आई। बस, आ ही गई। सचमुच बारिश ने अपना वादा निभाया। वह ताबड़तोड़ आई। मूसलधार आई।
बारिश आई, तो नाले ने अपना प्रतिशोध लिया। उफन उठा। सारा कचरा उनके मुंह पर उलट दिया, जिन्होंने फेंका था। अखबारों, चैनलों और सोशल मीडिया ने जब नाले के इस पराक्रम की प्रशंसा की, तो वह फूले नहीं समाया। उसने अपने आपको धन्य महसूस किया। उसे इस बात का गर्व हुआ कि उसका तुच्छ जीवन कुछ तो काम आया। उसके हाथों वह काम हुआ, जो बड़े-बड़े रिपोर्टर, एक्टिविस्ट और विपक्षी दलों के खुर्राट नेता नहीं कर पाए।