Gen Z Handling 75 Sankirtans Youths Growing Inclination Towards Spirituality In Vrindavan
‘आज जेन-ज़ी ही करवाते हैं 75 प्रतिशत संकीर्तन’
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT न्यूज, लखनऊ : युवा जब वृंदावन आएं तो इसे सिर्फ एक टूर या रील बनाने का जरिया न समझें। वृंदावन प्रेम की नगरी है, वहां जाकर युवा 'रील' से पहले 'रियल' (वास्तविक) अध्यात्म से जुड़ें और अपने भीतर के अध्यात्म को पुष्ट करें, तभी असली आनंद मिलेगा।
ये बातें वृंदावन के प्रसिद्ध भजन गायक बाबा चित्र विचित्र ने NBT से विशेष बातचीत में कहीं। वे शुक्रवार को शहरवासियों को राधानाम की भक्ति में सराबोर करने और भजन सुनाने के लिए मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने युवाओं से लेकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा तक पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने युवा पीढ़ी (जेन-जी) के धर्म और अध्यात्म की ओर बढ़ते रुझान पर बताया कि आजकल उनके लगभग 75% आयोजनों का जिम्मा खुद युवा ही संभालते हैं। जो यह दर्शाता है कि युवाओं में आध्यात्मिक सोच तेजी से जागृत हो रही है। 'अंधेरा बहुत है, नए चिराग जलाओ': धर्म और अध्यात्म से युवाओं के जुड़ाव की सराहना करते हुए उन्होंने एक पंक्ति भी कही कि 'अंधेरा बहुत है, नए चिराग जलाओ'। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि संकीर्तन में रील्स बनना अलग बात है, लेकिन मुख्य उद्देश्य वास्तविक भक्ति होना चाहिए।
लखनऊ में होता है भक्ति का पूर्ण दर्शन: लखनऊ के बारे में उन्होंने कहा कि यहां जितनी बार हम आए उतनी बार संकीर्तन सुनने आने वाले हर एक श्रद्धालु के भीतर हमें भक्ति का पूर्ण दर्शन हुआ। इस वर्ष अमरनाथ मिश्रा के लाडले ठाकुर द्वारकेश लाल के पाटोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित संकीर्तन में भक्तों का ऐसा अथाह जनसमूह उमड़ा कि जगह छोटी पड़ गई। लेकिन भक्तों के इसी अनूठे उत्साह ने उनकी वाणी को ऊर्जा दी और उन्हें आंतरिक सुख पहुंचाया।