Bidhan Chandra Roy Became A Great Doctor And Chief Minister By Following The Path Of Truth
सच्चाई की राह
नवभारतटाइम्स.कॉम•
1 जुलाई 1882 को बिहार के बांकीपुर (पटना) में जन्मे बिधानचंद्र राय बचपन से ही सत्य, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के संस्कारों में पले-बढ़े। चिकित्सक बनने का सपना लेकर उन्होंने कठिन परिश्रम किया और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाया। अपनी प्रतिभा और सादगी के कारण वह जल्द ही सभी के प्रिय छात्र बन गए। इसी दौरान एक दिन उनके एक प्राध्यापक की कार से दुर्घटना हो गई। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी केवल बिधानचंद्र थे। प्राध्यापक ने उनसे न्यायालय में झूठी गवाही देकर स्वयं को बचाने का आग्रह किया। इतना ही नहीं, उन्होंने परीक्षा में अनुत्तीर्ण करने की धमकी भी दी। लेकिन, बिधानचंद्र सत्य से तनिक भी नहीं डिगे। न्यायालय में उन्होंने वही कहा जो अपनी आंखों से देखा था। परिणामस्वरूप प्राध्यापक को दंड मिला और द्वेषवश उन्होंने बिधानचंद्र को अपने विषय में अनुत्तीर्ण कर दिया। इससे उनका एक वर्ष नष्ट हुआ, पर सत्य का साथ नहीं छोड़ा। बाद में वही भारत के महान चिकित्सकों में गिने गए और 1948 से 1962 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। उनका जीवन सिखाता है कि सत्य की राह कठिन हो सकती है, पर वही व्यक्ति को सम्मान, विश्वास और अमर प्रतिष्ठा दिलाती है।