n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव
कोर्ट परिसर में रेकॉर्ड रूम में लगी आग का असर अब वकीलों के काम पर भी पड़ने लगा है। सुरक्षा कारणों से मुख्य न्यायालय परिसर के साथ-साथ वकीलों के बैठने के लिए निर्धारित हॉल नंबर एक, दो और तीन को बंद कर दिया गया है। इससे परिसर में बैठने वाले 1500 से अधिक वकीलों के सामने अपनी प्रैक्टिस जारी रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
जिला बार असोसिएशन के पूर्व प्रधान व वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी संतोख सिंह ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि हॉल बंद होने से वकीलों का काम पूरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसका प्रतिकूल असर अदालती कार्यप्रणाली पर भी पड़ रहा है। चौधरी संतोख सिंह के अनुसार, मुख्य न्यायालय भवन में संचालित लगभग 21 अदालतों का काम इस आग के कारण प्रभावित हुआ था। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत PWD रेस्ट हाउस में इन अदालतों के संचालन की व्यवस्था कर दी और न्यायिक अधिकारियों को आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करा दीं। हालांकि, अदालतों के लिए तो वैकल्पिक स्थान उपलब्ध करा दिया गया, लेकिन जिन 1500 से अधिक वकीलों के बैठने के हॉल बंद किए गए हैं, उनके लिए अब तक कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वकील न्याय प्रशासन का अभिन्न अंग हैं और उनके लिए उचित कार्यस्थल उपलब्ध कराना सरकार व प्रशासन की जिम्मेदारी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि इन 3 हॉलों का उपयोग रोजाना 1500 से अधिक वकील केस की तैयारी, दस्तावेज तैयार करने और अपने मुवक्किलों (क्लाइंट्स) से मुलाकात के लिए करते थे। हॉल बंद होने के बाद वकील खुले में बैठने को मजबूर हैं, ऐसे में समाधान जरूरी है।



